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सुरक्षित हो ऑनलाइन बैंकिंग

सुरक्षित हो ऑनलाइन बैंकिंग

ऑनलाइन बैंकिंग को पिछले कुछ सालों में काफी लोकप्रियता मिली है। ऑनलाइन शॉपिंग से लेकर मनी ट्रांसफर तक के लिए इसका प्रयोग खूब किया जा रहा है। लेकिन जैसे-जैसे इंटरनेट की जरूरत और उपयोगिता बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे साइबर क्राइम का ग्राफ भी ऊपर बढ़ता जा रहा है और ऑनलाइन बैंकिंग पर भी साइबर अपराधियों की नजर लगी ही रहती है। ऑनलाइन बैंकिंग की असावधानी के कारण अक्सर अकाउंट में हेराफेरी के मामले सामने आते ही रहते हैं। पिछले ही दिनों दिल्ली में चार साइबर अपराधी पकड़े भी गए थे। ऐसे में जरूरी है कि ऑनलाइन बैंकिंग को सुरक्षित बनाया जाए।

वैसे लोगों को तो अब ऑनलाइन बैंकिंग की जानकारी हो ही चुकी है, फिर भी यहां यह जान लेना ठीक रहेगा कि ऑनलाइन बैंकिंग क्या है। ऑनलाइन बैंकिंग इंटरनेट पर बैंकिंग संबंधी मिलनेवाली एक सुविधा है, जिसके माध्यम से कंप्यूटर का इस्तेमाल कर उपभोक्ता बैंकों के नेटवर्क्स और उसकी वेबसाइट पर अपनी पहुंच बना सकता है और घर बैठे ही शॉपिंग, मनी ट्रांसफर के अलावा अन्य तमाम कार्यों और जानकारी के लिए बैंकों से मिलने वाली सुविधा का लाभ उठा सकता है। इस संबंध में सबसे जरूरी है कि किसी भी नेटबैंकिंग सेवा के इस्तेमाल के पहले उस बैंक के दिशा-निर्देशों को पढ़ लेना चाहिए। सभी बैंकों के दिशानिर्देश एक जैसे नहीं होते, बल्कि उनमें कुछ बातों की भिन्नता होती है। इसलिए उनको ठीक से जान लेना बेहद जरूरी है।

अक्सर लोग ऑनलाइन बैंकिंग को सामान्य बैंकिंग की ही तरह समझ लेते हैं, जबकि सामान्य बैंकिंग के मुकाबले इसमें बेहद सावधान रहने की जरूरत होती है। इसके लिए जरूरी है यदि आपने एक बार ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल कर लिया, तो प्रत्येक दूसरे या तीसरे दिन अपने अकाउंट को चेक करें और किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में बैंक को तुरंत सूचना दें। लंबे समय तक ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल नहीं करने से आपको अपने अकाउंट में होनेवाली किसी गड़बड़ी का पता नहीं चल सकेगा। आपके अकाउंट में हैकर्स द्वारा किए गए किसी घपले के लिए बैंक खुद को जिम्मेदार नहीं मानता और न ही इस संबंध में किसी बीमे की व्यवस्था ही होती है।

ऑनलाइन बैंकिंग के माध्यम से आप शॉपिंग या कारोबार के लिए जिस भी वेबसाइट का इस्तेमाल करते हैं, उसके बारे में पता लगा लें कि उस पर काम करना कितना सुरक्षित है। यदि आप किसी ऐसी वेबसाइट पर अपना कारोबार शुरू कर देते हैं, जो असुरक्षित है, तो आप मुसीबत में फंस सकते हैं। कोई वेबसाइट सुरक्षित है या नहीं, इसकी जानकारी उसके यूआरएल (डोमेन) को ध्यानपूर्वक देखने से हो जाती है। इस संबंध में किसी बैंक या विशेषज्ञ से प्रैक्टिकल जानकारी ली जा सकती है। जब भी इंटरनेट बैंकिंग के लिए आप जाते हैं, तो ध्यान रखें कि बैंक का सही यूआरएल ही लिखें। कोशिश करें कि अपने कंप्यूटर या लैपटॉप का ही इस्तेमाल इंटरनेट बैंकिंग के लिए करें। ऐसे किसी भी काम के लिए साइबर कैफे से दूर ही रहें। यदि अपने कंप्यूटर के अलावा किसी दूसरे कंप्यूटर पर आपको नेटबैंकिंग करनी पड़ गई, तो फौरन अपना पासवर्ड बदल दें। इसके अलावा जिस वेबसाइट पर आपने काम किया है, उसे लॉगऑफ करना भी न भूलें।

एक नजर..

साइबर कैफे का इस्तेमाल ऑनलाइन बैंकिंग के लिए न करें, पर यदि करना पड़ गया तो तुरंत अपना पासवर्ड बदल दें।

घरेलू कंप्यूटर या लैपटॉप का ही इस्तेमाल ऑनलाइन बैंकिंग के लिए करें।

बैंक और संबंधित वेबसाइट के यूआरएल को जरूर ठीक से लिखें।

हर दूसरे या तीसरे दिन अपना अकाउंट जरूर चेक करें।

अपना पासवर्ड किसी को न दें और न ही उसे इधर-उधर कहीं लिखें।

कंप्यूटर पर भी पासवर्ड डाल दें, ताकि कोई दूसरा उसे खोल न सके। इसके अलावा स्क्रीनसेवर पासवर्ड भी डाल दें।

किसी एक्सपर्ट की मदद से अपने कंप्यूटर पर फायरवाल इंस्टाल करवा दें। इससे दूसरे आपके कंप्यूटर में किसी तरह से सेंध नहीं लगा सकते।

नेटबैंकिंग के बाद कंप्यूटर को लॉगऑफ जरूर करें।

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