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दो टूक

सख्त कानून और उसके प्रचार से ही अगर बदलाव आ जाता तो अभी तक रैगिंग कब की रुक गई होती। कानून से ज्यादा जरूरी होता है लोगों तक यह संदेश जाना कि कॉलेज प्रशासन उसे लागू करने के लिए सचमुच गंभीर है।

दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज में रैगिंग के आरोप में दो छात्रों को निष्कासित किए जाने से यह संदेश निश्चित रूप से पहुंच गया होगा। यह सच है कि ऐसी कार्रवाई सीनियर छात्रों में भय पैदा करेगी। अच्छा होता कि हम रैगिंग को बिना कानून और भय पैदा किए खत्म कर पाते। फिलहाल तो यह मुमकिन नहीं दिख रहा। इन छात्रों पर लगे आरोप सचमुच गंभीर हैं, ऐसे मामलों में सख्त सज का कोई विकल्प भी नहीं होता।

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