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बुनियादी सुविधाओं का अभाव में यात्रियों का परेशानी

कौशाम्बी बस अड्डा पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। बस अड्डे के नाम पर केवल बाउंड्रीवाल है। न तो कोई आफिस है और न ही यात्रियों के बैठने की व्यवस्था। पूछताछ के लिए यहां काउंटर भी नहीं बना है, जिससे लोग बसों के आगमन-प्रस्थान के बारे में जान सकें।


दिल्ली और यूपी सरकार के बीच समझोता होने के बाद प्रदेश सरकार की ज्यादातर बसें आनंद विहार बस अड्डे से ही चलाई जा रही हैं। इससे कौशांबी बस अड्डा लगभग उपेक्षित है। दफ्तर की कोई बिल्डिंग नहीं है। सरकारी अधिकारी के नाम पर एक बाबू गेट के आसपास बैठा रहता है, जो रजिस्टर हाथ में लेकर बसों के आने-जाने के समय नोट करता रहता है। न तो बैठने की जगह है और न ही टायलेट की व्यवस्था। किसी बस के बारे में जानकारी लेने के लिए कोई इन्क्वायरी काउंटर तक नहीं है। इस बस अड्डे से रोजाना लगभग 50 गाड़ियां निकलती है। ज्यादातर गाड़ियां मेरठ, बुलंदशहर, बिजनौर, मुजफ्फरनगर और कोटद्वार तक जाती हैं। आलम यह है कि हर दस मिनट में बस खुलने के बावजूद यात्रियों की भीड़ लगी रहती है। इसके बाद भी रोडवेज के अधिकारियों का ध्यान बुनियादी सुविधाओं को मुहैया कराने के लिए नहीं जाता है। मेरठ जाने वाले एक यात्री रमेश ने बताया कि गर्मी के मौसम में लोगों को बैठने तक की सुविधा नहीं है। बस कब जाएगी, यह बताने वाला भी कोई नहीं है। न तो कोई बाथरूम की व्यवस्था है और न ही पानी की कोई व्यवस्था की गई है। हल्की सी बारिश में बस अड्डे के चारों ओर पानी लग जाता है। कीचड़ के कारण बस निकलने में भी दिक्कत होती है। इस व्यवस्था से बसों के ड्राइवर और कंडक्टर भी परेशान रहते हैं। एक बस के ड्राइवर ने बताया कि कैंटीन आदि की व्यवस्था न होने के कारण खाने-पीने की भी समस्या हो जाती है।

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