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कृष्ण जन्माष्टमी 13 अगस्त को

जन्माष्टमी को लेकर इस बार भी विद्वानों के बीच मतभेद की स्थिति बनी हुई है। मतभेद को दूर करने के लिए विभिन्न विद्वानों ने आयोजित एक गोष्ठी में निर्विवादित रूप से 13 अगस्त को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाना शास्त्र सम्मत बताया है।

अखिल भारतीय ज्योतिष परिषद के तत्वावधान में हुई बैठक में विद्वानों ने कहा कि भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अर्ध रात्रि व्यापिनी अष्टमी ही वास्तविक जन्माष्टमी है। ज्योतिष परिषद के महासचिव आचार्य कृष्णदत्त शर्मा ने कहा कि इस वर्ष विक्रम संवत् 2066 में धर्म सम्मत दृश्य गणित के अनुसार 13 अगस्त यानी गुरुवार को मध्याह्न् 12 बजकर 56 मिनट तक भाद्रपद कृष्ण सप्तमी है। इसके उपरांत अष्टमी तिथि रात्रि पर्यन्त दूसरे दिन शुक्रवार को पूर्वान्ह 11 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। इस प्रकार 13 अगस्त को चन्द्रोदय के समय अष्टमी विद्यमान रहने से जन्माष्टमी व्रतोत्सव का सवरेत्तम काल उपलब्ध हो रहा है। इस समय कृष्ण जन्माष्टमी पूजन, भगवान को झूला झुलाना अघ्र्य आदि का विशेष महत्व रहेगा।

उन्होंने कहा कि कुछ संगठनों ने जन्माष्टमी पर्व को लेकर भ्रम की स्थिति बना रखी है। 14 अगस्त यानी शुक्रवार को अष्टमी तिथि सुबह 11 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होकर नवमी तिथि शुरू हो जाएगी। ऐसे में व्रत अष्टमी का न होकर नवमी का हो जाएगा। आचार्य जी ने कहा कि देशभर के धर्माचार्य और पंचागंकार इस विषय में एक मत हैं। लाल बहादुर शास्त्री केन्द्रीय विद्यापीठ के डा. शुक देव चतुर्वेदी, प्रो. औंकारनाथ चतुर्वेदी और देवी प्रसाद त्रिपाठी ने भी केन्द्र सरकार से मांग की है कि शास्त्रीय पक्ष को मान्यता देते हुए कृष्ण जन्माष्टमी का सरकारी अवकाश 13 अगस्त को ही रखा जाए।

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