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सरकारी दफ्तर खुले मगर सन्नाटा रहा

सावन का अंतिम सोमवार काशीवासियों के लिए खास महत्व रखता है। अपनी सामथ्यर् मुताबिक हर काशीवासी पूजा-पाठ में तल्लीन रहता है। विशेष रूप से लोग रूद्राभिषेक कराते हैं। अंतिम सोमवार को यहां अर्से से सार्वजनिक छुट्टी होती रही है। डीएम अपने अधिकारों के तहत लोकल हॉली-डे घोषित करते थे। लेकिन पिछले साल से यह छुट्टी खत्म हो गयी। लिहाजा सरकारी दफ्तर खुले मगर अघोषित छुट्टी का माहौल रहा।

अफसर तो कार्यालयों में बैठे लेकिन फरियादियों की संख्या नगण्य थी। डीएम का कहना था कि उन्हें तीन छुट्टियों का अधिकार है। बनारस में ये तीनों छुट्टियां तय थीं। एक मकर संक्राति, दूसरी नाटी इमली भरत मिलाप और तीसरी थी सावन के अंतिम सोमवार की छु्ट्टी लेकिन पिछले कुछ सालों से होली के सुबह की नयी छुट्टी जुड़ गयी।

इसके कारण सोमवार की छुट्टी कट गयी। लोग बड़ी उम्मीद में थे कि कोई न कोई रास्ता निकलेगा लेकिन निराशा मिली। बेसिक विद्यालयों में छुट्टी रही, मगर अधिकांश निजी स्कूल खुले रहे। इसके कारण अभिभावक असहज दिखे। कचहरी में भी वकील तो आए पर मुवक्किल गायब। इससे ज्यादातर मामलों में तारीखें आगे बढ़ीं।

 

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