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बिजलीघरों पर संकट की काली छाया, खत्म हो रहा कोयले का स्टॉक

एनटीपीसी के विभिन्न बिजलीघरों में महज एक दिन का ही कोयले का स्टाक शेष रह गया है। इसके कारण गंभीर बिजली संकट का खतरा उत्पन्न हो गया है। फरक्का, तालचर, कहलगांव के अलावा कई अन्य बिजलीघरों में कोयले का स्टाक पूरी तरह खत्म हो गया है। ऐसे में बिजलीघरों को मजबूरन बंद करने की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

बिजलीघरों में कोयले का स्टाक खत्म होने का सीधा असर बिहार पर पड़ने की आशंका है। केन्द्रीय प्रक्षेत्र से बिहार का आवंटन पहले ही घटाकर आधा कर दिया गया है। अब एनटीपीसी के बिजलीघरों में शीघ्र ही कोयले की आपूर्ति नहीं हुई तो बिहार गंभीर बिजली संकट की चपेट में आ जाएगा।

इस समय बिहार अपनी बिजली जरूरतों के लिए पूरी तरह केन्द्र पर ही निर्भर है। बिहार के बरौनी बिजलीघर पर भी कोयला संकट की काली छाया मंडराने लगी है। कोयले की किल्लत के कारण यहां मजबूरी में उत्पादन आधा कर देना पड़ा था। अब तो वहां उत्पादन ही ठप है। यही हाल कांटी बिजलीघर का भी है वहां भी कोयले का स्टाक बहुत थोड़ा रह गया है। वहां भी इस समय उत्पादन ठप है।

तालचर, फरक्का बिजलीघरों में कोयले की कमी का ही असर है कि वहां से बिहार की आपूर्ति घटकर आधी हो गई है। इन बिजलीघरों का अपना उत्पादन भी पहले की अपेक्षा काफी कम हो गया है। बताया जाता है कि अगर शीघ्र इन बिजलीघरों को कोयले की आपूर्ति नहीं की गई तो क्षमता के अनुरूप बिजली का उत्पादन दूर की बात हो जाएगी। कोयले की कमी को दूर करने के लिए एनटीपीसी ने विदेशों से कोयले का आयात शुरू किया है लेकिन उससे भी संकट हल नहीं हो पा रहा है।

केन्द्रीय विद्युत राज्यमंत्री भरत सिंह सोलंकी ने सोमवार को राज्यसभा में स्वीकार किया कि गत 28 जुलाई को फरक्का, तालचर और कहलगांव एसटीपीएस संयंत्रों में कोयले का स्टाक एक-एक दिन का रह गया था। बदरपुर टीपीएस में पांच दिन और दादरी एनसीटीपीपी में सात दिन का स्टाक रह गया था।

सिन्हाही एसटीपीएस में कोयले का स्टाक तीन दिन का रह गया था। उन्होंने बताया कि फरक्का, कहलगांव, तालचेर और सीपत में कोयले का स्टाक घट गया है।  

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  • Web Title:कोयले के लिए त्रहिमाम, एक दिन का ही स्टाक