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टीआरपी का स्वयंवर

इलेश के गले में माला पहनाने के साथ राखी के स्वयंवर का नाटकीय समापन हो गया। पिछले एक महीने से चल रहे राखी का स्वयंवर कार्यक्रम को लोकप्रिय बनाने के लिए एनडीटीवी इमेजिन ने कोई कसर नहीं छोड़ी। इस कार्यक्रम से एनडीटीवी इमेजिन अपनी टीआरपी बढ़ाने में भले ही सफल हो गया हो, पर दर्शकों के मन में यह सवाल अभी भी कुलबुला रहा है कि इतनी मेहनत से चुने गए वर से राखी क्या वास्तव में विवाह करेगी? अगर नहीं, तो क्या यह पूरा कार्यक्रम दर्शकों के साथ धोखा नहीं? अभी तो हमारी सगाई हुई है। एक-दूसरे को समझने के लिए हमें थोड़ा वक्त चाहिए या स्वयंवर पार्ट-दो लेकर आऊंगी। चलते-चलते राखी का ऐसे जुमले कसना क्या यह नहीं दर्शाता कि यह पैसा कमाने, प्रचार पाने और दर्शक बटोरने की लड़ाई थी? निश्चित रूप से इस कार्यक्रम को भरपूर दर्शक मिले और चैनल टॉप 10 में बना रहा। राखी सावंत और स्वयंवर में आए दूल्हों को कितना पैसा मिला, इसका अभी खुलासा नहीं हुआ है, पर इन सभी को प्रचार जबरदस्त मिला। लेकिन जिस फूहड़ ढंग से गहनों और कपड़ों का प्रदर्शन किया गया, उसे देख कर लगता है कि शादी-ब्याह में आपसी संबंधों पर कम, दिखावे पर ज्यादा जोर है।

एक तरफ दहेज और शादियों में बेवजह की तड़क-भड़क का विरोध किया जाता है और दूसरी तरफ भावी पीढ़ी को ऐसे सपने दिखाए जा रहे हैं, जिन्हें पूरा करना ज्यादातर के बस की बात नहीं। निश्चित रूप से लड़कियों को अपना वर चुनने का अधिकार होना चाहिए, पर इस तरह एक परंपरा का मजाक बना कर नहीं। अपने साथी का चुनाव एक-दूसरे को जान कर समझदारी से किया जाना चाहिए ताकि दहेज जैसी कुरीतियों पर भी अंकुश लग सके। इस तरह सार्वजनिक प्रदर्शन कर भावी दूल्हों को अपनी धुन पर नचा कर वर चुनना क्या उनकी भावनाओं से खिलवाड़ नहीं? ऐसे संबंध कितने मजबूत रह पाएंगे, कहना मुश्किल है। विवादों के जरिए प्रसिद्धि पा चुकी राखी आइटम गर्ल के रूप में जानी जाती थी, लेकिन इस साधारण अभिनेत्री ने असाधारण काम कर देश-विदेश में जबरदस्त प्रसिद्धि हासिल कर ली है। साथ ही ऐसे रियलिटी शोज़ होने चाहिए या नहीं, इस पर एक नयी बहस छेड़ दी है। सवाल यह भी है कि क्या शादियां टीआरपी से भी तय हो सकती हैं? 

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  • Web Title:टीआरपी का स्वयंवर