DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पूरे उ.प्र. को सूखाग्रस्त घोषित करने से इनकार

एकजुट विपक्ष के उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार पर बरसने के बावजूद राज्य सरकार ने सोमवार को पूरे राज्य को सूखाग्रस्त घोषित करने से इन्कार कर दिया।

विपक्ष ने मायावती सरकार पर किसानों की समस्याओं को अनदेखा करने का आरोप लगाया। विधानसभा में सूखे पर चर्चा को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सदस्यों ने जमकर हंगामा किया। सरकार के निर्णय के विरोध में सदन में अध्यक्ष के आसन के निकट आ गए। भाजपा सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।

कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि सरकार ने राहत कार्यों के लिए पर्याप्त धनराशि जारी नहीं की है और वह मूर्तियों और स्मारकों में ज्यादा दिलचस्पी ले रही है। विपक्ष ने सदन में सरकार विरोधी नारेबाजी और शोरगुल किया, जबकि सत्तापक्ष ने विपक्ष पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया।

शोर-शराबे के बीच संसदीय कार्यमंत्री लालजी वर्मा ने कहा कि सरकार किसानों को राहत देने का हर प्रयास कर रही है और पहली बार जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने के मानक में बदलाव किया गया है।

विपक्षी सदस्यों ने कृषि मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण के उस बयान पर भी विरोध दर्ज किया। जिसमें उन्होंने कहा था कि विपक्षी सदस्य सरकार की आलोचना करके सिर्फ राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं।

वर्मा ने कहा कि 58 जिले सूखाग्रस्त घोषित किए जा चुके हैं। जिनमें तेजी से राहत कार्य किया जा रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के साथ पक्षपात पूर्ण व्यवहार के लिए केन्द्र की आलोचना की और कहा कि न तो प्रदेश को वित्तीय पैकेज दिया गया और न ही उसकी मांग के अनुरुप अतिरिक्त बिजली दी जा रही है।

यह मुद्दा शून्यकाल में विपक्ष ने एक काम रोको प्रस्ताव के रुप में उठाया और नेताओं की बात सुनने के बाद अध्यक्ष सुखदेव राजभर ने इसे खारिज कर दिया।

विरोधी दल के नेता शिवपाल सिंह यादव ने मांग की कि प्रदेश के सभी 71 जिले सूखाग्रस्त घोषित किए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अकाल जैसी स्थिति है और सरकार छोटे और मझोले किसानों को राहत देने के मामले में लापरवाही बरत रही है।


चर्चा की शुरुआत करते हुए सपा के अम्बिका चौधरी ने आरोप लगाया कि राज्य की बसपा सरकार सूखाग्रस्त जिलों की पूरी तरह उपेक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले मे अधिकारी गलत आंकड़े दे रहे हैं और मुख्य सचिव के निर्देशों के बावजूद इन जिलों में राहत कार्य नहीं किया जा रहा है।

भाजपा के हुकुम सिंह का कहना था कि चारे के अभाव के कारण मवेशी मर रहे हैं और सूखा प्रभावित क्षेत्रों मे सिंचाई सुविधाएं देने के प्रयास नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि धान की फसल की सिर्फ 25 फीसदी ही बुवाई हुई और सूखे के कारण गन्ने की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। सरकार को किसानों को मुफ्त बीज या डीजल पर सब्सिडी देना बाकी है।

उन्होंने कहा कि सूखे के कारण सब्जियां महंगी हुई है और सरकार को इसकी तनिक भी चिन्ता नहीं है। कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने सूखे की स्थिति पर केन्द्र और राज्य के बीच बातचीत टूटने का उल्लेख किया और कहा कि 24 जुलाई तक राज्य सरकार ने सूखे की स्थिति पर कोई कार्यवाही नहीं की लेकिन केन्द्रीय कृषि मंत्री के यह कहने कि उत्तर प्रदेश इस मामले में सम्पर्क नहीं कर रहा है, पर सरकार बहुत सक्रिय हो गई।

सूखाग्रस्त जिलों में लोगों को बीपीएल की दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि केन्द्र को आरोपित करके बसपा सरकार सूखे पर राजनीति कर रही है। रालोद नेता कोकब हमीद ने भी ऐसे ही विचार प्रकट किए।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:पूरे उ.प्र. को सूखाग्रस्त घोषित करने से इनकार