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भारतीयों ने मलेशिया में गांव बचाने को निकाली रैली

मलेशिया में रहने वाले भारतवंशियों ने 150 साल पुराने चरवाहों के एक गांव को सहराज्य बनाने के लिए ध्वस्त किए जाने से बचाने के लिए सोमवार को रैली निकाली।

उत्तरी पेनांग प्रांत की बुआ पाला गांव की किस्मत मलेशियाई विपक्षी गठबंधन के लिए सिरदर्द बन गई है। उसने पिछले साल पेनांग कानियंत्रण लिया था लेकिन वह 2005 में एक को-आपरेटिव को भूमि बेचने के पूर्ववर्ती प्रशासन के फैसले को पलटने में अक्षम है। इस गांव को ढाहे जाने से विपक्ष के प्रति भारतवंशियों का समर्थन खतरे में पड़ जाएगा। उसने अल्पसंख्यकों की ओर से मलय बहुल संघीय गठबंधन सरकार पर नस्ली आधार पर भेदभाव का आरोप लगाए जाने के बाद हाल में बड़ी राजनैतिक प्रगति की है।

करीब 300 लोगों के इस गांव का भारतवंशियों के लिए काफी महत्व है क्योंकि यह पेनांग में बची हुई उनकी सबसे पुरानी बस्ती है। मलेशिया की शीर्ष अदालत ने जून में व्यवस्था दी थी कि ग्रामीण बिना किसी मुआवजे के गांव को खाली कर दें। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों को उस गांव की जमीन बेचने से पहले उनसे सलाह-मशविरा करना चाहिए था जहां उनका परिवार वर्ष 1850 से रह रहा है।

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