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अंबानी विवाद में केंद्र निष्पक्ष, जनहित ऊपरः देवड़ा

अंबानी विवाद में केंद्र निष्पक्ष, जनहित ऊपरः देवड़ा

अंबानी बंधुओं के बीच चल रही औद्योगिक जंग के बीच पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने संसद में कहा कि सरकार का दो उद्योगों या उद्योगपतियों के बीच चल रही निजी लड़ाई से कोई लेना देना नहीं है और सरकारी हित तथा जनहित की रक्षा के लिए सबकुछ किया जायेगा।

इसके साथ ही देवड़ा ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार उत्तर प्रदेश के दादरी संयंत्र को गैस का आवंटन उपलब्धता के आधार पर करेगी। उन्होंने लोकसभा में दिए बयान में इस बात पर जोर दिया कि अंबानी परिवार के विवाद में बंबई उच्च न्यायालय के आदेश के कार्यान्वयन का गैस उपयोग नीति को बनाने और उसे लागू करने के सरकार के अधिकार पर असर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों और उत्पादन साझेदारी अनुबंध (पीएससी) के प्रावधानों के बावजूद भी, आदेश मानता है कि अम्बानी एमओयू के प्रावधानों पक्षकारों पर बाध्यकारी हैं। निर्णय के अनुसार एमओयू में उल्लिखित है कि 12 एमएमएससीएमडी गैस एनटीपीसी को दी जायेगी, 28 एमएमएससीएमडी गैर आरएनआएल को दी जायेगी और शेष गैस एडीएजी के विकल्प पर आरआईएल और आरएनआरएल के बीच 60:40 के अनुपात में बांटी जायेगी।

बंबई उच्च न्यायालय ने 15 जून को मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस इंडस्ट्रीज को अपने पीक आउटपुट का एक तिहाई उस दर पर बेचने का निर्देश दिया था, जिसे सरकार ने 2006 में ठुकरा दिया था और 44 प्रतिशत मौजूदा मंजूर कीमतों से कम पर बेचने को कहा था।

देवड़ा ने कहा,  यह हमारा संवैधानिक और कानूनी कर्तव्य है। हम गैस के उपयोग के विनियमन और इसके आवंटन के सरकार के कानूनी हितों की रक्षा के लिए सभी प्रयास करेंगे।  केजी 6 जैसे क्षेत्रों के लिए पीएससी के प्रावधानों के तहत तय सरकार की गैस उपयोग नीति में दुर्लभ राष्ट्रीय संसाधन का न्यायपूर्ण तरीके से व्यापक हित में उपयोग की वकालत की गयी है।

उत्तर प्रदेश के साथ गैस के आवंटन में भेदभाव के सपा नेता मुलायम सिंह यादव के आरोपों को खारिज करते हुए पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के साथ कोई भेदभाव नहीं है। मैं यह बात रिकार्ड पर लाना चाहूंगा कि दादरी में एनटीपीसी संयंत्र को 0.45 एमएमएससीएमडी गैस का आवंटन किया गया है जो ईजीओएम द्वारा तैयार किये गये मानदंड के अंतर्गत आता है।

उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह सपा ने यह मुद्दा उठाते हुए हंगामा किया था, जिसके बाद संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल ने लोकसभा में आश्वासन दिया था कि पेट्रोलियम मंत्री सोमवार को इस बारे में बयान देंगे। देवड़ा ने कहा,  जहां तक आरएनआरएल के दादरी विद्युत संयंत्र का संबंध है, मामले पर ईजीओएम द्वारा विचार किया गया था। यह संयंत्र तैयार या क्रियाशील नहीं है। देश के विभिन्न भागों के ऐसे कई अन्य संयंत्र हैं जो स्थापित किये जाने की प्रक्रिया में हैं।

उन्होंने कहा,  जहां तक विद्युत क्षेत्र का संबंध है, विभिन्न मौजूदा संयंत्रों को 18 एमएमएससीएमडी गैस आवंटित की गयी है ताकि वे अपने प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) में सुधार कर सकें। उन्होंने कहा कि यह नोट किया जाये कि ऐसे किसी संयंत्र को गैस का कोई आवंटन नहीं किया गया है जो मौजूद न हों या कार्य न कर रहे हो।

देवड़ा ने बताया कि आरएनआरएल के दादरी विद्युत संयंत्र के मामले पर ईजीओएम ने विचार किया था और आठ जनवरी 2009 को निर्णय लिया था कि उत्पादन आरंभ करने के लिए जब और जैसे ही दादरी विद्युत परियोजना सहित निर्माणाधीन परियोजनाएं तैयार हो जाती हैं, इन्हें आरआईएल केजी केजी डी 6 क्षेत्र से आवश्यक गैस आवंटन, गैस की उपलब्धता के आधार पर किया जायेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार ने आरआईएल-आरएनआरएल विवाद में बंबई उच्च न्यायालय में हस्तक्षेप किया था और अन्य बातों के साथ-साथ गैस उपयोग नीति सहित पीएससी के तहत अपने अधिकारों के संबंध में अपनी दलीलें पेश की थीं।

देवड़ा ने कहा कि न्यायालय ने सरकार की दलील स्वीकार कर ली और अंतरिम आदेश के परिणामस्वरूप गैस उत्पादन आरंभ हो गया तथा गैस की आपूर्ति ईजीओएम द्वारा अनुमोदित गैस उपयोग नीति के अनुसार प्राथमिकता क्षेत्रों को की जा रही है। उन्होंने बताया कि उर्वरक क्षेत्र में 15 एमएमएससीएमडी गैस की आपूर्ति के परिणामस्वरूप अनुमान है कि वार्षिक आधार पर तीन हजार करोड़ रुपये की राजसहायता (सब्सिडी) की बचत होगी।

उन्होंने कहा कि सदन को यह सूचित करते हुए उन्हें खुशी है कि एक अप्रैल 2009 से गैस उत्पादन शुरू होने से लगभग चार हजार मेगावाट अतिरिक्त विद्युत उत्पादन हो रहा है क्योंकि विद्युत क्षेत्र को 18 एमएमएससीएमडी गैस का आवंटन किया गया है। देवड़ा अपने बयान के साथ केडी 6 क्षेत्र से गैस ले रहे 15 गैस आधारित यूरिया संयंत्रों और 20 गैस आधारित विद्युत संयंत्रों की सूची भी पेश की।

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