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दो टूक

लोहिया-गांधीवादी युग के अवसान के बाद राजनीति दागदार हुई है, नेतृत्व पर ऊंगलियां उठती रही हैं। कुछ दलों ने अनुशासन और आदर्श की बिना पर दशकों अपनी साफ छवि बनाये रखी। भाजपा के अनुशासन की मिसाल दी जाती थी। पर यह दीवार अब ढहती नजर आ रही है। झारखंड में ही देखिये। सोमवार को प्रदेश अध्यक्ष और संगठन मंत्री को घेर कर चतरा-पलामू के भाजपाइयों ने उन्हें दमभर कोसा, अभद्रता की, उग्र शब्दों का प्रयोग किया। टिकट बेच देने के आरोप लगाये। भाजपा की ऐसी छवि तो नहीं थी। यह तय है कि भाजपा के अनुशासन के पेड़ में महत्वाकांक्षा का मट्ठा पड़ चुका है।

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