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डॉक्टर साहब को ठौर मिले तो करें मरीचाों की बेहतर सेवा

चिकित्सा विश्वविद्यालय के एनेस्थीसिया विभाग के एक प्रोफेसर के पास न चपरासी है, न फोन, न फ्रिा न सरकारी कम्प्यूटर..। ऐसा इसलिए क्योंकि चिविवि में यह नियम आज तक तय नहीं हो सके हैं कि किस कैडर के डॉक्टर के लिए क्या सुविधाएँ अनुमन्य हैं। यही वजह है जिसने उन 82 डॉक्टरों को परेशान कर दिया है जिन्होंने दो माह पहले नई नौकरी पाई है। इनमें से अधिकतर आज तक कक्षविहीन हैं।ड्ढr सबसे बुरा हाल मेडिसिन विभाग में है। यहाँ नए नियुक्त हुए 10 में से आठ डॉक्टरों के लिए बैठने का इंतजाम नहीं है। चिविवि प्रशासन ने सुबह आठ से शाम पाँच बजे तक डॉक्टरों की मौजूदगी का आदेश कर दिया है। ऐसे में डॉक्टर दिन भर बैठने की जगह तलाशते नजर आते हैं। एक डॉक्टर का कहना है कि हमें रिसर्च और मरीाों की केस स्टडी करनी होती है। बैठने के लिए जब जगह ही नहीं होगी तो काम कहाँ करेंगे? सर्जरी विभाग में छह में से एक डॉक्टर को कमरा मिला है। तीन डॉक्टर एक कमरे में बैठ रहे हैं तो दो के पास केवल टहलने का ही विकल्प है। पैथोलॉजी विभाग में छह और दंत संकाय में नौ डॉक्टरों की नियुक्ित हुई है। लेकिन यह भी कक्ष के मामले में मायूस हैं। नए डॉक्टरों की बात छोड़ भी दी जाए तो कुछ पुरानों का हाल भी बुरा है। सारे अधिकार विभागाध्यक्ष के पास होने की वजह से वह जिसको चाहें कक्ष देते व दूसरी सुविधाएँ उपलब्ध कराते हैं। कई वरिष्ठ डॉक्टर इसी वजह से चपरासी और एसी तक से महरूम हैं। रािस्ट्रार वीपी सिंह का कहना है कि यह सच है कि संस्थान में अभी इस बावत नियम नहीं हैं लेकिन जल्दी ही नियमों का निर्धारण किया जाएगा।ड्ढr भले ही चिविवि में नए डॉक्टरों के बैठने का प्रबंध न हो सका हो लेकिन इनमें से अधिकतर के लिए फर्नीचर पहले ही खरीद लिया गया। एक डॉक्टर के लिए तीन कुसियाँ, एक मेज, अलमारी व कुछ अन्य आवश्यक चीजें पहले ही खरीद कर आ गईं। डॉक्टरों का कहना है कि प्रशासन को पहले कक्ष आवंटन पर ध्यान देना चाहिए फिर खरीद पर।

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