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संस्कृत पूर्ण साहित्य है ठाकुर

बिहार के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति डा.मिश्री लाल ठाकुर ने संस्कृत को ज्ञान का भंडार बताते हुए कहा कि यह पूर्ण साहित्य है जिसमे अनेक विद्याओं का खजाना छुपा है।
 
ठाकुर ने कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय संस्कृत सप्ताह कार्यक्रम का शुभआरंभ करने के बाद कहा कि संस्कृत भाषा का साहित्य समृद्ध है लेकिन इसे रोजगारोन्मुख बनाकर जन सेवा से जोड़ा जाना जरूरी है और तभी इसका लाभ सभी को मिल सकता है। उन्होंने संस्कृत के छात्रों को अंग्रेजी भी पढ़ने की सलाह दी।

पटना विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के अध्यक्ष डा. रामविलास चौधरी ने कहा कि संस्कृत भाषा संरक्षित और सुरक्षित है। इस भाषा का अटूट संबंध हमारी संस्कृति सभ्यता एवं मान - सम्मान से है। उन्होने संस्कृत से भरे समाजवाद सादगी एवं त्यागपूर्ण जीवन के उपदेश से सभी को परिचित कराने पर बल दिया और उन्होंने शिक्षकों से इसका गुढ़ अर्थ बताकर छात्रों को तैयार करने की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने श्रीमद्भाभागवत को समाजवादी सिद्धान्त का मूल स्त्रोत बताते हुए कहा कि मनोयोग से र्काव्यों का निर्वहन ही धर्म है।

कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति डा. नंद किशोर शर्मा ने कहा कि भाषा एवं संस्कृति में अटूट संबंध है। पढ़ना लिखना और बोलना इसका सोपान है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि संस्कृत राष्ट्र भाषा ही नहीं व्यवहार की भाषा रही है।

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