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15 दिन से ठप है कामकाज, महाविद्यालयों के रिजल्ट निकलने के आसार नहीं

कर्मचारियों की हड़ताल के कारण 15 दिन से सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में कामकाज ठप है। प्रशासन अपने स्टैंड पर तो कर्मचारी अपनी जिद पर। दोनों के बीच संवाद बंद है।  कुलपति की चेतावनी का कर्मचारियों पर कोई असर नहीं है। शासन के संज्ञान में भी पूरी स्थिति है, लेकिन गतिरोध खत्म करने की दिशा में कोई प्रयास नहीं हो रहा है। इसका सीधा असर देशभर के उन हजारों छात्रों पर पड़ रहा है, जिनके रिजल्ट अभी नहीं निकले हैं।

ये सभी छात्र सम्बद्ध महाविद्यालयों के हैं, इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव भी नहीं बना पा रहे हैं। हड़ताल के कारण उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन ठप है। अंकपत्रों व प्रमाणपत्रों का सत्यापन नहीं हो रहा है। सत्र को नियमित करने की विश्वविद्यालय प्रशासन की योजना भी खटाई में पड़ गई है। कर्मचारियों के मजे हैं। आते हैं नारेबाजी करते हैं और चले जाते हैं। 

कर्मचारी अड़े हैं कि प्रशासकीय पदों पर कार्य कर रहे अध्यापकों को हटाया जाए। प्रदेश शासन ने इस बारे में शासनादेश जारी कर दिया है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि शिक्षकों से प्रशासकीय काम लेना उनकी मजबूरी है। जब तक शासन से प्रशासकीय अधिकारी भेजे नहीं जाएंगे, शिक्षकों से ही काम लेना होगा। इस बारे में शासन को अवगत करा दिया गया है।

कर्मचारियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच कई बार वार्ता हुई, लेकिन नतीजा नहीं निकला। कर्मचारियों का रुख अब आलोचना का विषय बन रहा है। लोगों का कहना है कि विश्वविद्यालय में अधिकांश प्रशासकीय पद खाली हैं, वहां शिक्षक ही काम कर रहे हैं। वहां के कर्मचारियों को कोई आपत्ति नहीं है। फिलहाल, विश्वविद्यालय प्रशासन और कर्मचारियों की रस्साकशी में छात्रों का भविष्य पिस रहा है।

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  • Web Title: कर्मचारियों की हड़ताल में पिस रहे छात्र