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बोल बम से गूंजते रहे शहर के मार्ग

गंगा का तट, तट पर बसी काशी। काशी में विराजमान ज्योतिर्लिंग विश्वेश्वर। सावन का महीना। सब देवाधिदेव भगवान शंकर के प्रिय। मौसम भले अहसास न करा सका हो लेकिन सच यही है कि सावन बीतने को है। फिर शिवभक्त भला अपने आराध्य को इस महीने में कैसे भूलें? सावन के अंतिम सोमवार (3 अगस्त) को भक्तों के उमड़ने का आभास रविवार को ही लग गया।

सावन के अंतिम सोमवार को ही शाम को बाबा का रुद्राक्ष से विशिष्ट श्रृंगार भी होना है। खास यह कि सोमवार को ही प्रदोष का मान भी है। इस अलौकिक झांकी को कौन नहीं आंखों में समेटना चाहेगा। स्थान अतिसंवेदनशील होने और अपार भीड़ के मद्देनजर प्रशासन ने भी चौकस व्यवस्था कर रखी है।

रविवार को शहर में चहुंओर शिवभक्तों का हुजूम। सड़कों पर ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ का उदघोष सुनाई पड़ रहा था। लाउडस्पीकरों पर तेज ध्वनि में गूंजते भजनों पर भक्त नाचते या तो बाबा दरबार की ओर बढ़ रहे थे या फिर दर्शन-पूजन, जलाभिषेक कर खुद को धन्य समझते लौट रहे थे। बाबा के दर्शन के पूर्व दूर-दराज के शिष्य गंगा स्नान करना नहीं भूल रहे थे, लिहाजा घाटों पर भी पूरे दिन भीड़ रही। भीड़ को देखते हुए चप्पे-चप्पे पर फोर्स तैनात थी।

बैरिकेडिंग बांध कर तैयार कर दी गई है। रविवार को भी यहां लम्बी कतार लगी रही। सोमवार को बाबा का दर्शन पूर्ववत प्रात:काल मंगलआरती के बाद प्रारंभ होगा और देर रात तक चलेगा। बीच में भोग आरती और सप्तर्षि आरती के दौरान गर्भगृह में भक्तों का प्रवेश रोक दिया जाएगा। चितरंजन पार्क स्थित शिवशक्ति कांवरिया तीर्थयात्री सेवा शिविर और लक्सा स्थित श्री बाबा काशी विश्वनाथ भक्त सेवा समिति के शिविर कांवरियों और तीर्थयात्रियों से भरे रहे।

स्वयंसेवक पूरे मनोयोग से उनकी सेवा में जुटे रहे। ज्योतिषी विमल जैन के अनुसार सोम प्रदोष के दिन रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है। यह व्रत पुत्र की प्राप्ति, परिवार की मंगल कामना तथा भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए किया जाता है। पांच अगस्त रक्षाबंधन के दिन विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में झूलनोत्सव में बाबा संग पार्वती व गर्णश की रजत प्रतिमाओं के दर्शन होंगे।

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  • Web Title:काशी विश्वनाथ मंदिर में उमड़े श्रद्धालु