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class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बैंक में पैसा जमा करने पर हाल फिलहाल में अधिकतम करीब 11 फीसदी की ब्याज दर मिली थी। अब यह दर गिरकर आठ फीसदी से भी कम पर आ गई है। लेकिन इन बैंकों में म्यूचुअल फण्ड के माध्यम से निवेश करने वाले को छह माह में ही पचास फीसदी से ज्यादा का लाभ मिल गया है।
 
गिरावट के वक्त लोग शेयर बाजार सहित म्यूचुअल फण्ड से दूर भाग रहे थे। लेकिन वित्तीय बाजार के जानकार लगातार कह रहे थे कि यही समय निवेश के लिए अच्छा है। उस वक्त बैंकों को तरलता की ज्यादा जरूरत थी ऐसे में उन्होंने करीब 11 फीसदी तक पर एफडी का ऑफर दे डाला। इसका सीधा सा असर हुआ कि बैंक में पैसा जमा करने वालों की लाइन लग गई। एक समय में तो स्टेट बैंक को रोज एक हजार करोड़ रुपए की एफडी मिल रही थी। कुछ ऐसा ही हाल ज्यादातर बैंकों का था।

दूसरी तरफ वित्तीय बाजार के जानकार निवेशकों का लगातार म्यूचुअल फण्ड में निवेश की सलाह दे रहे थे। जिन लोगों ने यह सलाह मानी होगी वह अब अच्छा रिटर्न लेने की स्थिति में होंगे। म्यूचुअल फण्ड कंपनियां ढेरों योजनाएं चलाती हैं। इनमें कुछ कंपनियों ने बैंकों को फोकस कर के भी योजनाएं चला रखी हैं। इन योजनाओं में एकत्र पैसे का काफी बड़ा हिस्सा बैंकों के शेयरों में लगाया जाता है। शेयर बाजार में सुधार आते ही बैंकों के शेयरों की हालात सुधर गई। इसका सबसे बड़ा कारण मंदी के दौरान बैंकों का अच्छा वित्तीय प्रदर्शन रहा है। बैंकों के अच्छे परिणाम से इनके शेयरों में तगड़ा फायदा हुआ। यह फायदा अब म्यूचुअल फण्ड की बैंकिंग योजनाओं में दिख रहा है।

सीता पोर्टफोलियो के सीएमडी संजीव अग्रवाल के अनुसार निवेश के लिए बाजार अभी भी अच्छा है। लेकिन निवेश से पहले अच्छी योजना को छांटना जरूरी है। इसके बाद जिनता भी निवेश करना हो उसका चौथाई हिस्सा फिलहाल निवेश किया जा सकता है। बाकी पैसा कुछ दिन बाजार की स्थिति पर नजर रखने के बाद लगाना चाहिए। वैसे श्री अग्रवाल की राय है कि हर माह एक निश्चित राशि का निवेश ज्यादा फायदेमंद तरीका है। इसमें बाजार गिरे या बढ़े निवेशक को अच्छी एवरेजिंग मिलती है। जो लम्बे समय में अच्छे फायदे का कारण बनती है।

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  • Web Title:बैंक से अच्छे निकले बैंकिंग फण्ड