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एक माह में छह लाश मिली

शहर के नाले मौत का सबब बन चुके हैं। गाद से लबालब खुले नाले सरेआम मौत को दावत दे रहे हैं। नालों में लाश मिलना आम हो चला है। जुलाई माह में ही नालों से करीब छह लाश पुलिस बरामद कर चुकी है। इनमें एक बिजली कर्मी भी अपनी जवां गवां चुका है। कई की शिनाख्त अभी तक नहीं हो पाई है। सड़क उठने से गहरे होते नाले व सफाई के अभाव को हादसों का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। नगर निगम प्रशासन प्रभावित व्यक्ति की लापरवाही को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहरा देता है।

मानसून से पहले पानी निकासी को लेकर निगम नालों की सफाई पर 30 से 40 लाख रुपये खर्च करता है। इस बार तो निगमायुक्त सीआर राणा ही नहीं, स्थानीय निकाय मंत्री एसी चौधरी ने भी नालों की सफाई को प्राथमिकता पर लिया। आदेश दिए। जेसीबी मशीने चलाई गई। निकली गाद को नालों के पास ही डाल दिया। मंत्री ने विरोध भी जताया। सुधार नहीं हुआ। बारिश आते ही गाद बहकर फिर नालों में चली गई। सफाई पर खर्च जनता के पैसे पर पानी फिर गया। इतना ही नहीं नालों को ढकने की कवायद शुरू की।

औपचारिक तौर पर कुछ नालों पर यह कार्य किया गया। बड़े नाले वंचित रहे। यानी समस्या ज्यों की त्यों खड़ी रही। निर्माण से शहर की सड़कों का लेवल उठ रहा है। नाले गहरे होते जा रहे हैं। आदमी को डूबाकर मारने की कुव्वत नालों की हो चुकी है। पुलिस की मानें तो जुलाई में छह लोगों को नाले निगल चुके हैं। अब लोग इनके पास से गुजरने से कतराने लगे हैं।

अब मामला और गंभीर इसलिए भी हो रहा है कि इनमें लोगों की लाश भी मिलने लगी हैं। लेकिन जिला प्रशासन और निगम प्रशासन आंख मूंदे हुए है। बल्लभगढ़ के नाले पर मुंडेर न होने से दो लोग हाल ही में अपनी जान गवां जा चुके हैं। सेक्टर-18 के एक नाले में बिजली कर्मी की मौत हो चुकी है।

पल्ला क्षेत्र में भी ऐसी ही एक घटना घटी। शहर के बीचोबीच गुजरने वाले एसी नगर के नाले की सफाई भी नहीं हुई।

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  • Web Title:मौत का सबब बने शहर के नाले