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एमपी 4

तकनीक के मामले में एमपी4 एमपी3 से कुछ ज्यादा अलग नहीं है, लेकिन एमपी3 की तुलना में यह ज्यादा कॉम्पलेक्स होता है। मान लीजिए आपको सात बार डी बोलना है, तो ऑडियो फॉर्मेट में इसे डी7 के रूप में लिख दिया जाता है। इससे ऑडियो फाइल कंप्रेस हो जाती है। ऑडियो फाइल की तुलना में वीडियो फाइल को कंप्रेस करना मुश्किल काम होता है। इसमें विशेष प्रकार के कोड तंत्र का इस्तेमाल किया जता है। कंप्रेशन और डिकंप्रेशन के जरिए चित्रों को फ्रीक्वेंसी डोमेन में ट्रांसफर किया जाता है। इसे कोडेक कहा जाता है। एमपी4 प्लेयर साधारण तरीके से काम करता है।

फायदा : एमपी4 का सबसे बड़ा फायदा है इसकी स्टोरेज क्षमता। उदाहरण के तौर पर यदि देखा जाए तो पूरी हिन्दी फिल्म कम से कम दो सीडी में आती है। अगर फिल्म की फाइल को एमपी4 में बदला जाए, तो एक एमपी4 में कम से कम चार-पांच फिल्म आ सकती है।

कई मामलों में जहां एमपी4 तकनीक फायदेमंद है, तो इस तकनीक के कई नुकसान भी हैं। मसलन एमपी 4 की वजह से पाइरेसी की समस्या बढ़ी है। इन फाइलों को डाउनलोड करने में समय काफी लगता है। साथ ही इनके बीच-बीच में रुकने की समस्या से भी दो-चार होना पड़ता है।

एमपीथ्री से कैसे अलग : जैसे एमपीथ्री फाइल किसी म्यूजिक या ऑडियो फाइल की गुणवत्ता को प्रभावित किए बिना कंप्रेस कर बनाई जाती हैं। ठीक उसी तरह एमपी4 वीडियो फाइल को कंप्रेस कर बनाई जाती है। यह नई तकनीक वीडियो फाइल को इतना घटा देती है कि उन्हें स्टोर करना बेहद आसान हो जाता है। ऑडियो-वीडियो के लिए बनने वाली भारी-भरकम फाइल कंप्रेस होकर एमपी4 के रूप में आती है।
 
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  • Web Title:एमपी 4