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एक साल बाद भी लागू नहीं हुई बाढ़ प्रबंधन की हाईटेक व्यवस्था

 उच्च तकनीक वाला ‘मोबाइल इंस्पेक्शन सिस्टम’ एक बार फिर फेल रहा है। बाढ़ प्रबंधन के मद्देनजर यह हाईटेक व्यवस्था पिछले साल जून में लागू हुई थी। शनिवार को सीतामढ़ी में बागमती का तटबंध टूटने की पूर्व सूचना मुख्यालय को नहीं मिलने से साफ है कि विभाग द्वारा इस सिस्टम को सही ढंग से अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। अभी तक अधिकारी यह तय नहीं कर पाए हैं कि आखिर तटबंध टूटा कैसे।

जल संसाधन विभाग द्वारा तैयार ‘एमईएस’ व्यवस्था के तहत समय रहते बाढ़ की सूचना देने के लिए मोबाइल फोन से नदियों के तटबंधों में होने वाली क्षति और दरारों का फोटोग्राफ लेकर ब्यौरा जुटाया जाना था। तय हुआ था कि संबंधित फोटोग्राफ तत्काल एमएमएस के माध्यम से राज्य मुख्यालय भेजे जाएंगे जहां उनको स्कैन कर फौरन रक्षात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी।

इससे कम समय में एक्शन लिया जा सकेगा जिससे जानमाल का नुकसान कम होगा। खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस व्यवस्था का लोकार्पण किया था। राज्य सरकार की पत्रिका ‘बिहार समाचार’ के जुलाई 2008 के अंक में इस बाबत ‘बाढ़ नियंत्रण में उच्च तकनीक’ शीर्षक से लेख प्रकाशित हुआ था। इसमें मुख्यमंत्री के हवाले से कहा गया था कि विभाग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पूर्व सूचना देने के लिए माइक्रो प्लानिंग सुनिश्चित करे ताकि समय रहते लोगों को सुरक्षित जगह पर ले जाया जा सके।

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  • Web Title:फिर फेल रहा मोबाइल इंस्पेक्शन सिस्टम