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अरब सागर में सुनामी चेतावनी तंत्र तैयार

अरब सागर में सुनामी चेतावनी तंत्र तैयार

भारतीय उपमहाद्वीप में अगला सुनामी मकरान तट से आने की अटकलों के बीच अरब सागर में भारत का सुनामी चेतावनी तंत्र पूरी तरह से काम करने को तैयार हो गया है।

पृथ्वी विज्ञान सचिव शैलेश नायक ने कहा कुछ विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि 60 वर्ष के बाद सुनामी क्षेत्र में दोबारा आता है और इसी आधार पर उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप में अगला सुनामी मकरान तट से आने की आशंका व्यक्त की है।

उन्होंने कहा लेकिन हमें इस क्षेत्र में ऐसी कोई हलचल नहीं दिखाई दे रही है। क्योंकि किसी भी बड़ी गतिविधि से पहले छिटपुट उथल-पुथल दिखाई देने लगती है। गौरतलब है कि मकरान तट से लगे क्षेत्र में पिछला सुनामी 28 नवंबर 1945 को आया था, जिसमें वर्तमान पाकिस्तान के कराची के आसपास के क्षेत्र, ओमान, ईरान और पश्चिमी भारत में लगभग 4,000 लोगों की मौत हो गई थी और इस प्राकतिक आपदा के 60 वर्ष से अधिक का समय गुजर चुका है।

उन्होंने कहा बहरहाल, ऐसी किसी भी प्राकतिक आपदा और गतिविधियों के आकलन के लिए अरब सागर में सुनामी चेतावनी तंत्र पूरा तरह से काम करने को तैयार है। नायक ने कहा सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदा के संबंध में भारत के पास पूरे हिन्द महासागर क्षेत्र के लिए परिकल्पना है और हम राष्ट्रीय क्षेत्रीय प्रणाली स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने कहा देश के दक्षिणी तटीय क्षेत्र में सुनामी चेतावनी तंत्र पहले से काम कर रहा है और हमने इसे व्यापक आधार देने की योजना बनाई है।

नायक ने कहा कि इसके तहत इसी अगस्त महीने में ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच अधिकारी स्तर की बैठक होने जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच इस बैठक में विचार-विमर्श के बाद एक रूपरेखा निर्धारित की जाएगी कि हम किस प्रकार आपस में मिलकर सुनियोजित तरीके से सुनामी का आकलन कर उसकी चेतावनी को क्षेत्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से जारी कर सकते हैं।

उन्होंने कहा हम सुनामी के दायरे में आने वाले क्षेत्र के देशों - श्रीलंका, मालदीव, बांग्लादेश, म्यामांर आदि के लिए सामान्य परामर्श जारी करने पर विचार कर रहे हैं। इस परामर्श के बाद इन देशों को विचार करना है कि कहां से और कैसे विस्तृत जानकारी प्राप्त करनी है। क्योंकि इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया ने भी सुनामी चेतावनी तंत्र विकसित किया है।

नायक ने कहा छह आठ महीने में यह व्यवस्था पूरी तरह से काम करने लगेगी। उन्होंने कहा हमारे यहां की प्रणाली प्रशांत महासागरीय क्षेत्र की तरह एकस्तरीय प्रणाली नहीं है बल्कि तीन स्तरों की है जिसमें राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक आकलन किया जाता है। उल्लेखनीय है कि सुनामी चेतावनी प्रणाली के तहत भीतरी जल क्षेत्र में सेंसर तथा संकेतक स्थापित किये जाते है जो भूगर्भीय प्लेटों के टकराव और तरंगों की गति का आकलन करते हैं।

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