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फोन न उठाने पर देना होगा जबाव

अब एमसीडी के जोनल उपायुक्तों को फोन न उठाना महंगा पड़ सकता है। अगर उपायुक्तों ने फोन बंद रखा या किसी कॉल को ठीक से अटैंड नहीं किया जो उनका जबाव तलब किया जाएगा। सीधे कंट्रोल रूम से आने वाले फोन उपायुक्तों को प्राथमिकता पर लेने होंगे।


यह आदेश निगमायुक्त के.एस.मेहरा ने जारी किए हैं। पिछले दिनों दो उपायुक्तों को फोन न सुनने पर मीमो जारी किया गया है। इन उपायुक्तों ने अपने वरिष्ठ अफसरों तक के फोन उठाने तक की जहमत नहीं उठाई। निगम में फोन न उठाने पर इस तरह की कार्रवाई पहली बार की गई है। अफसरों द्वारा फोन न उठाने को लेकर शिकायतें लगातार मिलती रही हैं और पाषर्र्द भी समय-समय पर यह मुद्दा उठाते रहे हैं। अफसर फोन को बिजी मोड पर डालकर छोड़ देते हैं या बैठकों में व्यस्त रहने की बात कहकर फोन करने वाले को टरका देते हैं जिससे आम जनता अफसरों से सीधे संपर्क नहीं कर पाती। निगमायुक्त ने कहा कि आखिर इंजीनियरों व अफसरों को सरकारी फोन क्यों दिया जाता है और इसका भुगतान भी निगम करती है तब कोई अफसर फोन सुनने की अनदेखी कैसे कर सकता है। यह बहुत गंभीर मामला है। कुछ अफसरों को खास हैंडसेट भी दिए गए हैं तथा एक खास सीरिज के नंबर आवंटित किए गए हैं। अगर उपायुक्तों ने फोन अटैंड नहीं किया तो उनका जबाव तलब भी किया जा सकता है। उन्हें हर फोन काल का जबाव देना होगा। अब ऐसे कर्मचारियों व अफसरों की सूची तैयार की जा रही है जो फोन सुनने से परहेज रखते हैं और उन्हें भी शीघ्र मीमो जारी किया जाएगा। निगम में सिस्टम को पारदर्शी व जबावदेह बनाने के लिए यह कवायद शुरू की है।

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