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22 फरवरी, 2020|10:13|IST

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मुशर्रफ को सऊदी अरब दे सकता है शरण

मुशर्रफ को सऊदी अरब दे सकता है शरण

वर्ष 2007 में आपातकाल लगाने के परवेज मुशर्रफ के फैसले को सुप्रीम कोर्ट के असंवैधानिक करार दिए जाने के बाद पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जहां नए संकट में नजर आ रहे हैं, वहीं सऊदी अरब ने कहा कि अगर पूर्व सैन्य शासक अनुरोध करते हैं तो वह उन्हें राजनीतिक शरण देने के बारे में विचार कर सकता है।

व्याख्यान देने के लिए वर्तमान में विदेश दौरा कर रहे 65 वर्षीय मुशर्रफ से जब एक टीवी चैनल ने संपर्क कर पाकिस्तान की शीर्ष अदालत के ऐतिहासिक फैसले के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। मुशर्रफ ने कहा कि वह फैसला पढ़ने के बाद ही अपनी प्रतिक्रिया देंगे।

इस मामले में तब एक नया मोड़ आ गया जब सऊदी अरब के राजदूत अब्दुल अजीज बिन इब्राहिम अल गदीर ने संवाददाताओं से कहा कि अगर पूर्व सैन्य शासक अनुरोध करते हैं तो उनका देश उन्हें राजनीतिक शरण देने के बारे में विचार करेगा। बहरहाल, मुशर्रफ, के बारे में कहा जा रहा है कि वह वर्तमान में यूरोप में हैं। उनके मुकदमे की सुनवाई में हाजिर होने की संभावना इस समय नजर नहीं आ रही है। संविधान का उल्लंघन करने के किसी भी आरोपी के खिलाफ अगर संघीय सरकार चाहे तो देशद्रोह का मुकदमा चला सकती है।

अप्रैल में पाकिस्तान से रवाना होने के बाद से मुशर्रफ विदेश में ही हैं और वे दुनिया भर में व्याख्यानों की सीरीज पूरी कर रहे हैं। उन्हें अब भी शक्तिशाली सेना का समर्थन हासिल है। बहरहाल, प्रभावशाली वकीलों के आंदोलन के जरिए मुशर्रफ पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने का आहवान किया जा रहा है। इस मुद्दे पर असैन्य सरकार की सेना के साथ टकराव होने की संभावना नहीं के बराबर है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में तीन नंवबर, 2007 को आपातकाल लगाने के मुशर्रफ के फैसले को अवैध और असंवैधानिक करार दिया लेकिन उनके खिलाफ कोई आदेश जारी नहीं किया। शीर्ष अदालत ने मुशर्रफ के नाम सिर्फ एक नोटिस जारी कर उनसे अदालत के समक्ष उपस्थित रहकर अपने फैसलों पर स्पष्टीकरण देने को कहा था लेकिन मुशर्रफ ने इस नोटिस को नजरअंदाज कर दिया।

जब यह जाहिर हो गया था कि शीर्ष अदालत मुशर्रफ को राष्ट्रपति पद पर बने रहने के लिए अयोग्य करार दे देगी क्योंकि वह सैन्य प्रमुख भी थे, तो तत्कालीन सैन्य शासक ने आपातकाल लागू कर दिया था। मुशर्रफ के मामले में शुक्रवार को फैसला सुना चुके चीफ जस्टिस इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी उन 61 जजों में शामिल थे जिन्हें आपातकाल के बाद पूर्व राष्ट्रपति ने अपदस्थ कर दिया था।

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