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संवेदनशून्य है उत्तर प्रदेश सरकार: पाल

कांग्रेस नेता और पार्टी सांसद जगदम्बिका पाल ने शनिवार को कहा कि उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती और उनकी सरकार जनसमस्याओं के प्रति उदासीन है। सरकार द्वारा जिलों को केवल कागजों में ही सूखाग्रस्त घोषित किया गया है और अभी तक राहत और सहायता सम्बन्धी कोई कार्य नहीं शुरू किया गया है।
 
पाल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी द्वारा बुन्देलखण्ड विकास प्राधिकरण के गठन की बात को उठाए जाने का मुख्यमंत्री द्वारा विरोध करना केवल राजनीति है। गांधी के मन में उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों और मध्य प्रदेश के जिलों को मिलाकर बुन्देलखण्ड विकास प्राधिकरण के गठन जो योजना है। उसका मुख्यमंत्री मायावती को स्वागत करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भुखमरी और कर्ज के कारण दो हजार से अधिक किसान आत्महत्या कर चुके हैं।
 
उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्र के विकास के लिए योजना को अमली जामा पहनाने के लिए गांधी के प्रयास का स्वागत किया जाना चाहिए किन्तु मुख्यमंत्री राजनीति से प्रेरित होकर अनर्गल प्रलाप कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि सिद्धार्थनगर जिले के 200 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं और 75 से अधिक गांव पानी से चारों ओर से घिर गए हैं। बाढ़ से डुमरियागंज तहसील का गामापुर बांध तथा इटावा तहसील के बजारा भारी मदरहवा नबेला बांधों में कटान शुरू हो गई है। सोतवा नाला बान गंगा तथा बूढ़ी राप्ती का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की भयावह स्थिति है। जिला प्रशासन द्वारा अभी तक न तो नागरिकों को नावें दी गई हैं और न ही किसी प्रकार का राहत कार्य शुरू किया गया है।

पाल ने मांग की कि सूखा प्रभावित जिलों में सभी प्रकार के कृषि ऋणों को माफ किया जाए। रोजगारपरक योजनाएं चलाई जाएं तथा बाढ़ पीडि़त क्षेत्रों के गांवों में नाव लगाने के साथ ही राहत और सहायता कार्य शुरू किया जाए।

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