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हाईटेक है आज की दोस्ती

दो अगस्त फ्रेंडशिप डे पर विशेष
भगवान श्रीकष्ण और उनके दीनहीन सहपाठी सुदामा की निश्छल और समर्पित मित्रता के दौर के बाद दोस्ती ने अब हाईटेक रूप ले लिया है और मित्रता के शीशे पर वक्त का धुंधलका भी साफ नजर आने लगा है। समाज पर विश्लेषण भरी नजर रखने वाले लोगों का मानना है कि सिकुड़ते समाज और उम्मीदों की भीड़ के बीच बढ़ते अकेलेपन में दोस्ती की अहमियत और बढ़ी है लेकिन मित्रता की आब अब बिरले ही दिखाई देती है।

स्माइल फाउंडेशन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता संदीप नायक मानते हैं कि समय के साथ दोस्ती के मायने और तौर—तरीके बदल गए हैं। उन्होंने कहा कि वक्त के साथ चीजें बदलती हैं और दोस्ती भी इससे अछूती नहीं रही है। पिछले करीब 10 वर्षों में समाज में बहुत तेजी से बदलाव आया है।

नायक कहते हैं कि अब कॉफी हाउस में अलग—अलग पीढ़ियों के लोगों के मिलकर गपशप करने और खुद तथा समाज से जुड़ी बातों पर गम्भीर विचार—विमर्श का दौर लगभग खत्म हो चुका है। वक्त के साथ सिनेमा हॉल का कौतूहल भी काफूर हो चुका है। अब सोशल नेटवर्किंग का जमाना है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में फ्रेंडशिप काफी हद तक टेक्नॉलॉजी पर आधारित हो चुकी है। लोग मोबाइल फोन के साथ—साथ ऑरकुट तथा फेसबुक समेत कई सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर बात करते—करते दोस्त बनते हैं और उन्हीं माध्यमों पर रिश्ते बनने बिगड़ने लगे हैं।

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