DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कलियुग में भक्ति का मार्ग सरल

श्री हरिगिरि आश्रम कनखल में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कपिल-देवहुति संवाद का वर्णन करते हुए कथाव्यास पं. चंद्रसागर महाराज ने कहा कि भगवान कपिल का अवतरण मोह पर विजय प्राप्त करने के लिए हुआ था, जिन्होंने अपनी माता देवहुति को सांख्य धर्म का उपदेश दिया। कपिलदेव ने यम-नियम और अष्टांग योग का निरुपण करते हुए ज्ञान-भक्ति और वैराग्य का विशद वर्णन किया।

उन्होंने कहा कि कलियुग में भक्ति का मार्ग अति सरल है, क्योंकि इसमें विश्वास के साथ अपने इष्ट पर आश्रित होना पड़ता है। भगवान मां बनकर भक्तों की रखवाली करते हैं। भक्त ध्रुव के चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि मात्र पांच वर्ष की अल्पायु में ध्रुव ने नारायण को प्रसन्न कर लिया था।

नारायण ध्रुव को दर्शन देने नहीं, अपितु ध्रुव का दर्शन करने आए थे। गुरू चरणों में दढ़ विश्वास और हरि चरणों में प्रगाढ़ श्रद्धा ही जीव को श्रीहरि से मिला देती है और नर को नारायण बना देती है। दो अगस्त को नंदोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:कलियुग में भक्ति का मार्ग सरल