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बल्लेबाजों पर ही टिकीं पाक की उम्मीदें

बल्लेबाजों पर ही टिकीं पाक की उम्मीदें

श्रीलंका के खिलाफ शनिवार को होने वाले दूसरे वनडे मैच में पाकिस्तान को बल्लेबाजी पर खासी मेहनत करनी होगी। पाकिस्तान के बल्लेबाजों के अंतिम टेस्ट में बढ़िया प्रदर्शन करने के बाद आशा बंधी थी कि वनडे मैचों में दोनों टीम के बीच जोरदार मुकाबला होगा। लेकिन जिस तरह से मेहमान टीम पहले मुकाबले में हारी। उससे तो यही लग रहा है कि यदि बल्लेबाजों ने आगे के मैचों में अच्छी बल्लेबाजी नहीं की तो उसकी हार का यह सफर आगे भी जारी रह सकता है।

पाकिस्तान की समस्या टीम संतुलन को लेकर भी है। पिछले कई सालों से सलामी बल्लेबाजी की समस्या से जूझ रहा पाकिस्तान अब भी इस मामले को लेकर असमंजस की स्थिति में है। फवाद आलम ने दो टेस्ट मैचों और फिर उसके बाद अभ्यास मैच में भी बढ़िया प्रदर्शन किया था। लेकिन उसके बाद उन्हें सलामी बल्लेबाज के तौर पर नहीं उतारना कहीं से गले नहीं उतर रहा। इसके अलावा सलामी बल्लेबाज के विकल्प के तौर पर इमरान नजीर भी पाक के पास उपलब्ध हैं।

उधर, मध्यक्रम में बढ़िया बल्लेबाजी करने वाले शोएब मलिक को सलामी बल्लेबाज के तौर पर आजमाने का कप्तान यूनुस खान का फैसला भी पूरी तरह गलत रहा। मलिक पूर्व में भी सलामी बल्लेबाज के तौर पर असफल रहे हैं। तीसरे क्रम पर आफरीदी को भेजने का टीम प्रबंधन का फैसला भी किसी को रास नहीं आया। न तो यह 20-20 मैच था और न ही श्रीलंका ने कोई पहाड़ जैसा लक्ष्य ही दिया था। उसके बाद फिर मोहम्मद युसूफ, कप्तान यूनुस खान और मिस्बा उल हक की असफलता ने टीम की जीत की आशाओं पर पानी फेर दिया।

निचले क्रम में फवाद आलम, उमर गुल और मोहम्मद आमेर ने अच्छी बल्लेबाजी कर यह जता दिया कि इस धीमे विकेट पर भी विजयी लक्ष्य हासिल किया जा सकता था। लेकिन जिस संयम से इसे प्राप्त करने की जरूरत थी, वह मध्यक्रम बल्लेबाजों ने नहीं दिखाया। इन सबसे ऊपर खुद कप्तान यूनुस खान को टीम के अन्य बल्लेबाजों के सामने अच्छी बल्लेबाजी का उदाहरण प्रस्तुत करना होगा। बहरहाल पाकिस्तान की नाकामी के लिए श्रीलंकाई गेंदबाजों की भी तारीफ की जानी जरूरी है।

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