DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

रेपो दर

केंद्रीय बैंक जिस दर पर सरकारी प्रतिभूतियों व बांड्स को पुनर्खरीद समझोते के तहत बैंकों को बेचती है, उसे रेपो दर कहते हैं। सरकार और रिजर्व बैंक के बीच उसकी खरीद-बिक्री के लिए समझोता हो जाता है। उस समझोते के तहत ही रिजर्व बैंक प्रतिभूतियों को खरीद लेती है और भविष्य में उसे बेचती है। वास्तव में इसके अंतर्गत केंद्रीय बैंक इस शर्त पर प्रतिभूतियों को बेचते हैं कि इतने दिनों के बाद पुन: खरीद लूंगा। इस दर की घोषणा रिजर्व बैंक द्वारा की जाती है।

रिवर्स रेपो दर
वह दर जिस पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अल्प अवधि के लिए अपनी प्रतिभूतियों को जमानत पर रखकर व्यापारिक बंकों से उधार लेता है और इसके बदले उन्हें वह बेहतर ब्याज देता है, को रिवर्स रेपो रेट कहा जाता है। जब रिवर्स रेपो दर को बढ़ाया जाता है तो इसका मतलब होता है कि रिजर्व बैंक बैंकों से पैसा उधार ले रहा है।

पीएलआर (प्राइम लैंडिंग रेट) : यह वह दर होती है जिसे सभी व्यापारिक बैंक, बैंक दर (वह दर जिस पर केंद्रीय बैंक सदस्य बैंकों के प्रथम श्रेणी के बिलों की पुनर्कटौती करती है) के ऊपर लगाती है।

सीआरआर (नकद सुरक्षित अनुपात) : सभी बैंकों को यह अनिवार्य है कि रिजर्व बैंक के पास अपने समस्त धन का कम से कम तीन प्रतिशत और अधिक से अधिक 15 प्रतिशत जमा रखें। नकद सुरक्षित अनुपात परिवíतत होता रहता है।        

(पाठकों की मांग पर)

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:रेपो दर