DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

गुरुदेव के पटना आगमन की याद में अब हर साल समारोह

बिहार महापुरुषों की भूमि है। यह महावीर, बौद्ध, आर्यभट्ट जसी विभूतियों की कर्मभूमि भी रही है। पटना विश्वविद्यालय के शिक्षकों, छात्रों को गर्व होना चाहिए कि वे इस विवि के अंग हैं, जहां गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर का आगमन हुआ था। ये बातें पटना विवि के कुलपति डा. श्यामलाल ने कहीं। गुरुदेव के पटना आगमन की याद में मंगलवार को पटना विश्वविद्यालय के व्हीलर सीनेट हॉल में आयोजित समारोह में कुलपति ने रवींद्रनाथ टैगोर की याद में हर साल 17 मार्च को कार्यक्रम कराने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि 17 मार्च 1ो गुरुदेव यहां आए थे और इसी हॉल में उनका अभिनंदन हुआ था।ड्ढr ड्ढr गुरुदेव का स्वागत करने वाले डा. दिलीप सेन व डा. जोगेश बनर्जी को भी सम्मानित किया गया। दोनों ने संस्मरण सुनाए। समिति के अध्यक्ष डा. डीके सिन्हा ने कहा कि बंगाल से बिहार के विभाजन के सौ साल पूरे होने के इतिहास को प्रोजेक्टर से दिखाया। इस मौके पर बच्चों ने नृत्य कर वाहवाही लूटी। प्रतिकुलपति डा. एसआई हसन, प्रो. सियाराम तिवारी, आचार्य कुमार विमल, अमल सेनगुप्त, जगदीश नारायण चौबे ने गुरुदेव के बार में चर्चा की। कुलसचिव डा. विभाष कुमार यादव, डा. ममता दास, डा. पूर्णेन्दु, जयंती सरकार, डेाी नारायण उपस्थित थे। कार्यक्रम का आयोजन पटना विवि, बिहार बंगला अकादमी एवं बंगला, भूगोल विभाग, बिहार बंगाली समिति की ओर से किया गया था।ड्ढr ड्ढr नेपाली चित्रकारों की तीन दिवसीय पेंटिंग प्रदर्शनी शुरू : कैनवास पर रंगों व कूचियों के सहार शांति की तलाश। नेपाल के तीन युवा कलाकारों द्वारा बौद्ध स्थलों पर रहकर बनायी गयी पेंटिंग्स यही कुछ कहती नजर आती है। रंगों का बखूबी इस्तेमाल इन पेंटिंग्स में हुआ है। कला व शिल्प महाविद्यालय में मंगलवार से ‘सर्चिग फॉर पीस’ नाम से तीन दिवसीय पेंटिग्स प्रदर्शनी शुरू हुई। प्राचार्य अनुनय चौबे ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: गुरुदेव के पटना आगमन की याद में अब हर साल समारोह