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कोरम के अभाव में पूरा नहीं हुआ जवाब, लोस स्थगित

लोकसभा में शुक्रवार को उस समय अजीबो-गरीब स्थिति पैदा हो गई जब कोरम के अभाव में मंत्री जवाब ही नहीं दे पाए और सदन निर्धारित समय से पहले स्थगित करना पड़ा।


15वीं लोकसभा के पहले सत्र में यह पहला मौका था जब कोरम का सवाल उठाया गया और उसके  चलते सदन की बैठक 15 मिनट पहले स्थगित करनी पड़ी। सदन में शुक्रवार का दिन गैर सरकारी सदस्यों के कामकाज के लिए निर्धारित होता है। इसी के तहत योजना एवं संसदीय मामलों के राज्य मंत्री वी.नारायणसामी, बीजद के वैजयंत पांडा द्वारा पेश गैर सरकारी विधेयक अल्पविकसित और पिछड़े क्षेत्र तथा अंचल (त्वरित विकास के लिए विशेष उपबंध) विधेयक 2009 पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे।


नारायणसामी के  जवाब के बीच ही उन्हें टोकते हुए भाजपा के अशोक अर्गल ने सदन में कोरम का सवाल उठाया। हालांकि उन्हीं की पार्टी के  कई सदस्यों ने उन्हें ऐसा नहीं करने को कहा, मगर वह नहीं माने। मंत्री ने भी कहा कि गैर सरकारी सदस्यों के कामकाज में कोरम का सवाल नहीं उठाया जाता।

गैर-सरकारी काम काज के दौरान सदन में आमतौर पर कोरम का अभाव रहता है लेकिन परंपरा के अनुसार सदस्य कोरम का सवाल नहीं उठाते हैं। अर्गल ने इससे पूर्व मंत्री के जवाब दिए जाने के दौरान ही आरोप लगाया कि सारी केन्द्रीय परियोजनाएं रायबरेली और अमेठी में लगाई जा रही हैं। मंत्री ने उनसे शांत रहने की अपील की लेकिन अर्गल अपनी बात दोहराते रहे और इसी बीच उन्होंने कोरम का सवाल उठा दिया। पीठासीन सभापति फ्रांसिस्को सरदिन्हा ने भी उनसे कोरम की मांग पर जोर न देने की अपील की लेकिन वह अपनी बात पर अड़े रहे। इस पर सभापति को कोरम की घंटी बजाने का आदेश देना पड़ा। कोरम की घंटी तीन बार बजने के बावजूद सदन में केवल 40 सदस्य ही उपस्थित हुए। जब सदन में कोरम पूरा नहंी हो पाया तो सभापति ने सदन की बैठक सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी।

लोकसभा में कोरम के लिए 54 से अधिक सदस्यों की जरूरत होती है। कोरम का सवाल उठने के कारण मंत्री का जवाब पूरा नहीं हो सका। उन्होंने अपने अधूरे जवाब में पिछड़े क्षेत्रों के विकास को लेकर सदस्यों की चिंता से सहमति जताई लेकिन साथ ही कहा कि इन क्षेत्रों की तरक्की राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है और केन्द्र इसमें केवल धनराशि उपलब्ध कराने की ही भूमिका अदा करता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य सरकारों को ही पहल करनी होगी क्योंकि उसके बिना केन्द्र अकेले आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न योजनाओं के लिए केन्द्र द्वारा दिए गए धन का कई राज्यों ने पूरा इस्तेमाल ही नहीं किया है। कोरम का सवाल उठने के कारण मंत्री का जवाब अधूरा रहा।

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