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हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप से प्रवीण वीर की मंजिल आसान

हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप से प्रवीण वीर की मंजिल आसान

प्रत्यूष कुमार नाथनगर नूरपुर में ही एक छोटी सी किराने की दुकान चलाते हैं। सीमित आय में तीन बेटे और एक बेटी का पालन-पोषण। ऊपर से बेटे प्रवीण को इंजीनियर बनाने का सपना। बड़ा मुश्किल लग रहा था लेकिन हिन्दुस्तान कोचिंग स्कालरशिप ने अब राह आसान कर दी है।

उनके बेटे प्रवीण वीर ने बिहार बोर्ड की दसवीं कक्षा में 74.6 प्रतिशत अंक हासिल किया है। प्रत्यूष कुमार मूल रूप से दरभंगा के रहनेवाले हैं। शुरू में कुछ दिनों तक भारतीय जीवन बीमा में एजेंट के रूप में काम किया। लेकिन जब परिवार चलाने में काफी दिक्कतें आने लगीं तब एक दुकान खोल ली। पूंजी के अभाव में दुकान में ज्यादा सामान नहीं है।

लेकिन आज इसी दुकान से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। वह अपने बेटे प्रवीण को किसी अच्छे स्कूल में पढ़ाना चाहते थे। पर पैसे के अभाव में प्रवीण का नामांकन सुखराज राय हाईस्कूल में करा दिया। प्रवीण ने मैट्रिक तक की पढ़ाई वहीं से पूरी की। दुकान के भरोसे आगे की पढ़ाई मुश्किल थी।

प्रवीण के पिता का मानना है कि अगर खाए-पीए-अघाए लोगों के बच्चे इंजीनियर बन सकते हैं तो उनका बेटा क्यों नहीं? तमाम विषम परिस्थितियों में उन्होंने बेटे को इंजीनियर बनाने की ठान ली। प्रवीण ने भी संसाधनों के अभाव में पढ़ना सीख लिया था। आईआईटी-जेईई की तैयारी के लिए प्रवीण कोचिंग करना चाहता था। लेकिन इसके लिए लाखों रुपए का इंतजाम कर पाना सबसे बड़ी समस्या थी। तभी हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप की घोषणा हुई और उसका चेहरा खिल उठा।

प्रवीण परीक्षा में बैठा और स्कॉलरशिप के लिए चुन भी लिया गया। प्रत्यूष ने बताया कि सममुच, अब बेटे की इंजीनियर बनाने की आकांक्षा जरूर पूरी होगी। प्रवीण का मानना है कि इस सफलता के पीछे माता-पिता का आशीर्वाद है। प्रवीण ने कहा कि हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप से मंजिल आसान हो गई है।

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  • Web Title:इंजीनियर बनने की है तमन्ना हुई पूरी