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गुमशुदा बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ रही है

जिला अपराध अभिलेख ब्यूरो के आंकड़ों की मानें तो गुमशुदा बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वहीं दूसरी ओर इनकी पड़ताल के लिए खोली गई बाल हेल्पलाइन स्टाफ की कमी से जूझ रही है। एक सब इंस्पेक्टर के भरोसे पूरी बाल हेल्पलाइन है। वह चाहते हुए भी बच्चों को खोजने में मदद नहीं कर पा रहा है। काम की अधिकता के कारण तफ्तीश लटकी हुई हैं। इस बाबत बाल और महिला हेल्पलाइन प्रभारी सीओ सदर शाहजहां अंसारी ने बाल हेल्पलाइन में स्टाफ की कमी को स्वीकारा। उन्होंने बताया वरिष्ठ अधिकारियों से स्टाफ को बढ़ाने का अनुरोध किया गया है। 


थानों में एक माह से अधिक समय तक लंबित पड़े गुमशुदगी के मामलों की जांच करने के लिए बाल हेल्पलाइन खोली गई थी। ताकि कम समय में गुमशुदा बच्चों को तलाशा जा सके। लेकिन इस पहल पर स्टाफ के टोटे का ग्रहण लग गया है। एक सब इंस्पेक्टर पर जिले के 19 थानों का कार्यभार है। इसके साथ फाइल वर्क भी है। काम के दबाव और हैल्पिंग हैंड के अभाव में मामलों की तफ्तीश अधर में लटकी है।

पिछले दो महीने में बाल हेल्पलाइन के पास महज पांच मामले जांच के लिए पहुंचे हैं। तीन मामलों की पड़ताल बामुश्किल शुरु हो पाई है। दो केस अभी भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। इनमें कोतवाली के दो, कैंट, रायवाला और षिकेश थाने का एक-एक केस शामिल हैं। पुलिस अपनी विवेचना में आठ साल से सोलह के इन बच्चों के भागने का कारण आर्थिक रुप से कमजोर होना बता रही है।

दर्जनों बच्चे हैं गुमशुदा
जिला अपराध अभिलेख ब्यूरो के आंकड़ों को देखें तो हर महीने तीन से चार बच्चे लापता हैं। एक दो को छोड़ दें तो बाकियों का अभी पता नहीं है। तफ्तीश के नाम पर पुलिस ने इन मामलों को बाल हेल्पलाइन में भी नहीं भेजा है।
महीने  पुरूष  महिला  
जनवरी 2  3
फरवरी 4  4  
मार्च  1  1
अप्रैल 5  4
मई  7  3
जून  8  3
जुलाई 9  8 

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