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अब कैबिनेट नहीं लगाएगी कंसल्टेंट चयन पर मुहर

उत्तर प्रदेश के निवेशकों को लुभाने के लिए राज्य सरकार उन्हें कुछ और सहूलियतें देने जा रही है। पीपीपी परियोजनाओं के लिए कंसलटेंट के चयन और उनकी शर्तो के निर्धारण के लिए हर प्रस्ताव को तब ही अंतिम रूप दिया जाता था जब उसका अनुमोदन मंत्रिपरिषद द्वारा कर दिया जाए। जिससे कंसलटेंट चयन में देर होती थी।

अब परियोजना स्थल की कार्पोरेट बॉडी या  वहाँ के  विकास प्राधिकरण बोर्ड के निदेशक मंडल कंसलटेंट का चयन कर सकेंगे। जहाँ विकास  प्राधिकरण भी नहीं हैं वहाँ औद्योगिक आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति कंसलटेंट का चयन करेगी।

निवेशकों को सुविधा के तहत ही स्विस चैलेंज मैथड लागू किया जाएगा। यह निर्णय शुक्रवार को औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। इस नई व्यवस्था में अगर बिड की न्यूनमत दर से भी कम में बिड आती है तो दोबारा बिड फिर से आमंत्रित तो की जाएगी, लेकिन पहले आई बिड को निरस्त नहीं किया जाएगा बल्कि उस निवेशक को यह सुविधा रहेगी कि वह दोबारा आई बिडों के अधिकतम मूल्य से और अधिक मूल्य लगा दे।

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