DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

‘सार्वजनिक जगहों पर पूजास्थल न बनने दे केंद्र’

‘सार्वजनिक जगहों पर पूजास्थल न बनने दे केंद्र’

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केन्द्र सरकार से कहा कि वह सुनिश्चित करे कि सार्वजनिक स्थलों का अतिक्रमण कर कोई पूजा स्थल नहीं बनाया जा सके और इसके साथ ही कर्तव्य में लापरवाही करने वाले अधिकारियों के साथ कड़ाई से निपटने की चेतावनी दी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इस संबंध में आश्वासन मांगा और चार हफ्ते के भीतर एक हलफनामा दायर करने को कहा।

न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी और एमके शर्मा की खंडपीठ ने निर्देश दिया सोलीसिटर जनरल यह सुनिश्चित करने के लिए हलफनामा दायर करें कि सड़कों अथवा किसी सार्वजनिक स्थल पर कोई मंदिर, गिरजाघर, मस्जिद अथवा गुरूद्वारा नहीं बनाया जाएगा। पीठ ने इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख 29 सितंबर को निर्धारित कर दी। कोर्ट ने हालांकि वर्तमान धार्मिक संस्थाओं की इमारतों की तोड़फोड़ पर कोई आदेश जारी नहीं किया।

केन्द्र सरकार को यह निर्देश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया जिसमें गुजरात हाई कोर्ट के वर्ष 2006 के आदेश को चुनौती दी गई है। हाई कोर्ट ने अहमदाबाद के अधिकारियों को सड़कों पर पूजास्थलों सहित सभी अवैध ढांचों को गिराने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में इस आदेश पर रोक लगा दी थी।

पीठ ने कहा जहां तक वर्तमान धार्मिक संस्थाओं का संबंध है, हम समझते हैं कि उन्हें तोड़े जाने से कानून एवं व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होगी लेकिन केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि सार्वजनिक स्थलों पर कोई पूजास्थल नहीं बनाया जा सके।

कोर्ट ने कहा अगर सार्वजनिक स्थल पर एक भी ढांचा बनेगा तो संबंधित अधिकारी को दंडित किया जायेगा। सुब्रमण्यम ने कहा कि केन्द्र सरकार सभी राज्यों से बातचीत कर इस मुददे पर किसी आमसहमति तक पहुंचने की कोशिश करे। खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 29 सितम्बर तक टाल दी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:‘सार्वजनिक जगहों पर पूजास्थल न बनने दे केंद्र’