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बसपा और कांग्रेस एक बार फिर आमने सामने

कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी का विवाद अभी थमा नहीं कि बुन्देलखण्ड को लेकर कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) एक बार फिर आमने-सामने आ गई है। 
 

केन्द्र सरकार ने बुन्देलखण्ड के विकास के लिए बुन्देखण्ड विकास प्राधिकरण बनाने का प्रस्ताव किया है। इस प्रस्ताव का जहां कांग्रेसी स्वागत कर रहे हैं। वहीं बसपा अध्यक्ष मायावती ने इसे केन्द्र राज्य सम्बन्धों पर विपरीत प्रभाव पड़ने वाला कदम बताया है। 
 

दूसरी ओर प्राधिकरण के गठन को जानकार बुन्देलखण्ड को अलग राज्य बनाने की कांग्रेस की कोशिश के रुप में देख रहे हैं। बुन्देलखण्ड इलाके में उत्तर प्रदेश के सात और मध्य प्रदेश के पांच जिले आते हैं। बुन्देलखण्ड का लगभग पूरा इलाका विषम भौगोलिक स्थिति वाला है।
 

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि प्राधिकरण का गठन एक बड़ा राजनीतिक निर्णय हो सकता है। इस निर्णय के बाद बुन्देलखण्ड को अलग राज्य भी बनाया जा सकता है। बुन्देलखण्ड को राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग बहुत दिन से चल रही है।
 

इसी बीच प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को भेजे गए अपने पत्र में मुख्यमंत्री मायावती ने बुन्देलखण्ड क्षेत्र के लिए केन्द्र सरकार के नियंत्रण में परिषद प्राधिकरण के गठन के प्रस्ताव को केन्द्र राज्य सम्बंधों तथा संवैधानिक प्राविधानों की बुनियाद को चोट पहुंचने वाला बताया। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कल प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि मीडिया के हवाले से यह जानकारी मिली है कि केन्द्र सरकार जहां एक ओर बुन्देलखण्ड के विकास को लेकर प्रदेश सरकार के अनुरोध को पूरा करने पर विचार कर रही है। वहीं दूसरी ओर इस सम्बंध में केन्द्र सरकार के नियंत्रणाधीन एक अन्तर्राज्ईय बुन्देलखण्ड विकास प्राधिकरण परिषद के गठन की भी योजना बना रही है। 
 

पत्र में मायावती ने कहा है कि स्थानीय विकास की समस्याएं हल करने के लिए उत्तर प्रदेश में सक्षम प्रशासन तंत्र उपलब्ध है। पूर्वोत्तर परिषद .नार्थ ईस्टर्न काउंसिल. से इसकी तुलना किया जाना न तो उचित है और न ही आवश्यक।
 

उन्होंने कहा कि इस सम्बंध में मीडिया में प्रकाशित खबरों से यह संकेत मिल रहा है कि बुन्देलखण्ड के लिए गठित होने वाले प्राधिकरण.परिषद का उद्देश्य राज्य सरकार की भूमिका को सीमित करना है। उन्होंने कहा कि पहले भी देश के विभिन्न क्षेत्रों उत्तराखण्ड हिमाचल प्रदेश विदर्भ आदि के लिए विशेष पैकेज स्वीकृत किए गए लेकिन वे पैकेज कभी भी केन्द्र सरकार के सीधे नियंत्रण में नहीं रखे गए।
 

मुख्यमंत्री ने बुन्देलखण्ड के विकास के लिए राज्य सरकार के पूर्ण सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार का यह मानना है कि हो सकता है कि केन्द्र सरकार के लिए परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली कठिनाइयों की अपेक्षा धन स्वीकृत करना अधिक आसान हो।

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