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180 सांसदों ने की पीएम के बयान की मांग

180 सांसदों ने की पीएम के बयान की मांग

संसद के दोनों सदनों के 180 सांसदों के समूह ने एक केंद्रीय मंत्री द्वारा सीबीआई के एक मामले में मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को प्रभावित करने के कथित प्रयास के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बयान देने की मांग की।

लोकसभा के 85 और राज्यसभा के 95 सांसदों ने प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें कहा गया कि उन्हें मामले की जांच करनी चाहिए और संसद के दोनों सदनों में बयान देना चाहिए। प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपने वाले सांसदों में माकपा, भाकपा, अन्नाद्रमुक और भाजपा के सदस्य शामिल थे।

उल्लेखनीय है कि मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आर रघुपति ने खुली अदालत में यह बयान दिया था कि फर्जी अंकसूची घोटाले में एक केंद्रीय मंत्री ने उन्हें टेलीफोन किया था। घोटाले की जांच सीबीआई कर रही थी। उन्होंने कहा था कि केंद्रीय मंत्री ने कथित रूप से अनुशंसा की थी कि घोटाले के आरोपी को जमानत पर रिहा कर दिया जाए।

राज्यसभा सदस्य चंदन मित्रा ने संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री ने सांसदों को भरोसा दिलाया है कि ज्ञापन को देखने के बाद वह इस मामले पर उनसे बात करेंगे। चंदन मित्रा ने बताया कि प्रधानमंत्री ने सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से कहा कि देश के प्रधान न्यायाधीश ने स्पष्टीकरण दिया है कि केंद्रीय मंत्री ने न्यायाधीश से बात नहीं की, ऐसे में सरकार न्यायपालिका से जुड़े मामले में दखल कैसे दे सकती है।


राज्यसभा सदस्य चंदन मित्रा ने कहा कि इंटेलीजेंस ब्यूरो जैसी एजेंसियां उस फोन का नंबर खोज निकालने में सक्षम हैं जिसे एक वकील ने न्यायाधीश के कक्ष से कथित रूप से डॅायल किया था, इससे जांच पड़ताल में मदद मिल सकती है। उन्होंने ज्ञापन के हवाले से कहा, रिपोर्टों के मुताबिक, न्यायाधीश ने बाद में स्पष्टीकरण दिया कि मंत्री ने सीधे उनसे बात नहीं की थी, बल्कि आरोपी की पैरवी कर रहे वकील ने उनके कक्ष में आकर सूचित किया था कि एक केंद्रीय मंत्री उनसे बात करना चाहते हैं और यहां तक कि बातचीत कराने के लिए उसने फोन भी मिलाया था।

ज्ञापन में कहा गया है कि यदि न्यायाधीश के स्पष्टीकरण को सही मान भी लिया जाए तो भी यह एक मंत्री द्वारा न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप का प्रयास करने का मामला है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपे ज्ञापन में कहा गया है कि संविधान में वर्णित न्यायपालिका की स्वतंत्रता के सिद्धांत को बरकरार रखने और सार्वजनिक जीवन में शुचिता के सर्वोच्च मानकों को कायम रखने के लिए, देश के लोग आपसे इस मामले पर कार्रवाई करने की आशा करते हैं। हम आपसे संसद के दोनों सदनों में इस मामले पर बयान देने और समुचित कार्रवाई करने का आग्रह करते हैं।

प्रधानमंत्री से मुलाकात करने वाले सांसदों के प्रतिनिधिमंडल में राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली, माकपा नेता वृंदा करात, अन्नाद्रमुक नेता एम थम्बी दुरई और भाकपा केडी राजा शामिल थे।

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