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आईआईटी कानपुर के एफएम पर शास्त्रीय संगीत

आईआईटी कानपुर के एफएम पर शास्त्रीय संगीत

फीवर 104, बिग एफएम, रेडियो सिटी की तरह अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर का भी अपना एक एफएम स्टेशन होगा। पर यहां फिल्मी गाने नहीं, बिस्मिल्लाह खान की शहनाई जैसे शास्त्रीय संगीत सुनने को मिलेंगे।  साथ ही विज्ञान के रहस्यों को सरल भाषा में बताया जाएगा।

देश के किसी भी प्रौद्योगिकी संस्थान में यह पहला मौका होगा, जब एफ एम रेडियो की शुरुआत की जाएगी। इसके लिए संस्थान को भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय से हरी क्षंडी मिल चुकी है और फ्रीक्वेंसी भी जारी कर दी गयी है।

संस्थान ने इसके लिये परिसर में ही स्टूडियो का निर्माण कराया है। इसमें करीब 22 लाख रुपए के उपकरण भी लगाये जा चुके हैं। संस्थान प्रशासन को उम्मीद है कि आगामी क्रिसमस में यह एफएम रेडियो शुरू हो जाएगा।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के निदेशक प्रो संजय गोविंद धांडे ने कहा कि किसी भी प्रौद्योगिकी संस्थान में पहली बार खुलने वाला यह एफएम रेडियो स्टेशन अमेरिका के नेशनल पब्लिक रेडियो (एनपीआर) की तर्ज पर होगा, जिसमें ज्ञान-विज्ञान की बातों के साथ-साथ शास्त्रीय संगीत का भी समावेश होगा। उन्होंने कहा कि इस रेडियो स्टेशन से आपको भारतीय संस्कति के अनछुये पहलुओं के बारे में भी जानकारी मिलेगी।

धांडे के अनुसार आज आप अमेरिका के किसी भी विश्वविद्यालय या कॉलेज जाइये तो वहां आपको हर कक्षा या कार्यालय में एनपीआर बहुत ही धीमी आवाज में बजता सुनाई देगा। यह अमेरिका का सबसे लोकप्रिय रेडियो स्टेशन है। इसी तर्ज पर यहां भी एफएम रेडियो स्टेशन की स्थापना की जा रही है। उनके अनुसार प्रौद्योगिकी संस्थान के परिसर में रेडियो स्टेशन स्थापित करने की सारी औपचारिकतायें पूरी हो चुकी है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय से इस परियोजना को हरी झंडी भी मिल गयी है तथा फ्रीक्वेंसी भी जारी कर दी गयी है।

उन्होंने कहा कि परिसर में इसके लिये स्टूडियो का निर्माण भी हो गया है तथा इसके लिए करीब 22 लाख रुपए के उपकरण भी खरीदे जा चुके। धांडे के मुताबिक इसकी स्थापना के लिये प्रौद्योगिकी संस्थान के कुलसचिव प्रो संजीव कशालकर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय एक कमेटी का गठन किया गया है। इस समिति में छात्र-छात्रायें भी शामिल हैं । यह कमेटी रेडियो चलाने के लिये अपने सुझाव देगी। इससे मीडिया के लोगो को भी जोड़ने की योजना बनाई गयी है।

उन्होंने बताया कि इसकी सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इस पर फोन इन कार्यक्रम भी चलायें जायेंगे जिसमें संस्थान के वैज्ञानिक और प्रोफेसर शहर के छात्रों और अन्य लोगों की विज्ञान से जुड़े प्रश्नों का उत्तर देंगे। धांडे ने कहा कि शहर के दूसरे तकनीकी और अन्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्र-छात्राओं को अगर भौतिकी, रसायन, इंजीनियरिंग और जैव प्रौद्योगिकी जैसे विषयों से संबंधित कोई परेशानी है तो वह वह फोन कर अपनी परेशानियों का हल पा सकते हैं।

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