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नेताओं की बैठकों पर बैठकें हो रही हैं

एमसीडी की समितियों के अध्यक्ष व उपाध्यक्षों का नाम तय करने को लेकर भाजपा नेताओं की बैठकों पर बैठकें हो रही हैं लेकिन नाम तय नहीं हो पाए हैं। कई समितियों पर अभी भी नए व पुराने पार्षदों को जगह देने को लेकर विवाद बना हुआ है। पहली अगस्त को नामंकन की तिथि तय है। समझ जाता है कि शुक्रवार को होने वाली सदन की बैठक में भी समितियों का मामला भी उठ सकता है।


आखिर एक कमरा, पीए,टेलीफोन किसे नहीं चाहिए। बस इसी की लड़ाई इन दिनों पार्षदों में चल रही है। बेशक विशेष व तदर्थ समितियां एमसीडी की एडवाइजरी ही समङी जाती हैं लेकिन रूतबा जमाने के लिहाज से हर पार्षद इन समितियों का अध्यक्ष बनने की तमन्ना रखता है। उपाध्यक्ष को लेकर इतनी जोड़तोड़ नहीं है। पहले इन समितियों के अध्यक्ष व उपाध्यक्षों को लेकर कोई मारकाट नहीं थी लेकिन इस बार जिस तरह भाजपा की गुटबाजी खुलकर सामने आई है इससे समितियां भी सुर्खियों में आ गई है। भाजपा के दो गुट इन समितियों को लेकर चहेतों की पैरवी करने में जुटे हैं।


सदन के नेता कुछ पुराने पार्षदों को अनुभव के लाभ पर पद दिलाने के हक हैं तो नए पार्षद  इसका विरोध कर रहे हैं। कुछ नए पार्षदों ने इसके खिलाफ खुलेआम बगावती तेवर अपना लिए हैं। फिलहाल नाम तय करने का जिम्मा संगठन मंत्री विजय शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश कोहली व नेता सदन सुभाष आर्य को दिया गया है लेकिन यह तीनों नेता भी अभी नामों को अंतिम रूप देने में ही जुटे हैं। बताया जाता है कि अभी ऐसी समितियों के नाम तय कर दिए गए हैं जिनकी ज्यादा अहमियत नहीं समङी जाती। समितियों के नाम तय करना भाजपा के गले के हड्डी बन गई है। मालूम हो कि गुटबाजी के चलते दो बार समितियों के चुनाव टाले भी जा चुके हैं।

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