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जोनल व्यवस्था की मांग

पुलिस प्रशासन में जोनल व्यवस्था समाप्त होने का असर मऊ हादसे में देखने को मिला। जो काम यहां जोनल अधिकारी करते थे, वह हेडक्वार्टर को करना पड़ा। महकमे में ही चर्चा रही कि अगर जोनल व्यवस्था रहती तो मऊ में हालात काबू करने में इतनी देर नहीं लगती। जोन स्तर पर समन्वय की कमी से ही मऊ के पड़ोसी जिलों के अफसरों तथा फोर्स के मूवमेंट में काफी देर हुई। वैसे भी नक्सल प्रभावित पूर्वाचल में कई मौकों पर जोनल व्यवस्था समाप्त होने की कमी अखरती है।

पुलिस की प्रशासनिक व्यवस्था के तहत जोन स्तर पर आईजी का पद सृजित किया गया था। वाराणसी जिला पहले गोरखपुर में था लेकिन बाद में इसे अलग जोन बनाया गया। तब से यहां आईजी स्तर के अधिकारी बैठते थे। मौजूदा सरकार ने जोन की अवधारणा समाप्त कर दी। अब आईजी रेंज पदनाम कर दिया गया है। आईजी के जिम्मे सिर्फ चार जिले हैं जिसे पहले डीआईजी स्तर के अधिकारी देखते थे।

वाराणसी जोन में पहले 10 जिले आते थे। पूर्वाचल का बड़ा हिस्सा इससे जुड़ा था। सोनभद्र, मिर्जापुर समेत बलिया, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, चंदौली, जाैनपुर, भदोही जिले भी इससे जुड़े थे। भौगोलिक एवं सामाजिक परिस्थितियों का ताना बाना कुछ ऐसा है कि प्रशासनिक दृष्टि से भदोही को न तो जाैनपुर से अलग किया जा सकता है और न ही सोनभद्र को चंदौली से। भौगोलिक रूप से देखा जाए तो चंदौली व सोनभद्र के जंगल आपस में मिले हुए हैं।

चंदौली में कोई घटना हो तो सोनभद्र से पुलिस भेजने के लिए मिर्जापुर के डीआईजी से अनुमति लेनी पड़ती है। पहले जोनल अफसर खुद कोआर्डिनेशन कर लेते थे। भदोही व जौनपुर की सीमा आपस में जुड़ी हुई है। व्यावहारिक स्तर पर देखा जाए तो भदोही भी वाराणसी का ही हिस्सा है लेकिन यहां की सारी व्यवस्था अब मिर्जापुर से संचालित होती है।

बुधवार को मऊ की घटना के बाद पुलिस अफसरों में जोन समाप्त करने की खासी चर्चा रही। सूत्रों के अनुसार घटना के वक्त आईजी रेंज गुरदर्शन सिंह नौगढ़ में थे। सूचना तो समय से मिल गयी लेकिन हेड क्वार्टर से सूचना मिलने के बाद अपराह्न में वह मऊ रवाना हुए।

महसूस किया गया कि अगर जोन की व्यवस्था होती तो कम से कम करीब के जिला गाजीपुर, बलिया से पुलिस फोर्स आनन-फानन पर मौके पर रवाना कर दी जाती। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और फोर्स की कमी में ही स्थिति बिगड़ती गयी। पूर्वाचल में जब भी बड़ी वारदात होती है कम से कम वाराणसी से भारी फोर्स भेजी जाती रही है। मऊ में भी फोर्स भेजी गई पर विलंब से।

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