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शहर में दर्दनाक 11 मौतों का जिम्मेदार कौन?

पुलिस प्रशासन या फिर अथॉरिटी
जांच में अभी तक नहीं चली कलम


शहर के आईटी सेक्टर से सटे विशनपुरा गांव में 27 जुलाई को दीवार गिरने से 11 लोगों की मौत हुई और करीब आधा दजर्न घायल हुए, लेकिन इतनी बड़ी घटना के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है? यह सवाल सबको परेशान कर रहा है, मगर जवाब अभी तक शहरवासियों को नहीं मिला है। यही नहीं, जांच के नाम पर क्या किया जा रहा है, इसका भी अता पता नहीं है। कारण साफ है कि शहर में हुए इतने बड़े हादसे में आरोपियों को पुलिस, प्रशासन व अथॉरिटी तीनों ही बचा रही है। मामला एक बड़े कांग्रेसी नेता से जुड़ा है। हालांकि मामले में लखनऊ गृह मंत्रलय ने पूछे जाने के बाद रिपोर्ट तलब की है और आश्वासन दिया है कि दोषी पाए जाने पर लापरवाह अधिकारियों सहित दोषी व्यक्ति पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


स्थानीय स्तर पर प्रशासन, अथॉरिटी व पुलिस मूक बनी हुई है। पुलिस का दावा है कि मजिस्ट्रेट जांच चल रही है, लेकिन पहले दिन से घिरी पुलिस क्या इसकी सही जांच कर पाएगी। वहीं दूसरी तरफ शहर की सभी सुविधाओं सहित कंस्ट्रक्शन से जुड़े मुद्दों को देखने वाली अथॉरिटी अपना पल्ला झड़ कर रही है कि हम निर्माण कार्य में हस्तक्षेप नहीं करते, जबकि इसी अथॉरिटी ने करीब पांच माह पहले गिझोड़ गांव में एक मॉल बनने पर आपत्ति दर्ज करते हुए उसे सील किया था। अथॉरिटी के एक्ट के अनुसार नोएडा के सभी गांव उसके अधीन आते हैं। स्थानीय सभी सुविधाओं सहित सभी अवैध गतिविधियों को रोकने की जिम्मेदारी भी इनकी है, लेकिन इस मामले में उन्होंने पल्ला झड़ लिया है। शहर के बीचोबीच घटी इस घटना पर एनजीओ सहित फोरनवा ने आपत्ति दर्ज की है और कहा है कि वे इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत करेंगे। दूसरी तरफ बीजेपी व सपा पार्टी कार्यकर्ताओं ने मामले को लोकसभा में उठाने का आश्वासन दिया है।


क्यों नहीं की गई कार्रवाई: मरने वालों में वे लोग है जिन्हें दो जून की रोटी आसानी से नसीब नहीं होती और शहर में उनकी सुनने वाला कोई नहीं। दूसरी तरफ कांग्रेस के दबंग नेता रघुराज सिंह हैं। कारण साफ है कि जिसके पास खाने के लिए रोटी नहीं है वह केस की पैरवी कैसे करेगा? क्यों करेगा? शायद इसी के चलते अथॉरिटी, प्रशासन व पुलिस मौन है।


जिंदगी की कीमत लगी महज एक लाख - नोएडा के पुलिस-प्रशासन के नाकारापन का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है कि कांग्रेसी नेता की खूनी दीवार ने 11 गरीबों की जान ले ली और फिर प्रशासन ने एक लाख रुपए में उनकी जिंदगी का सौदा कर दिया। यूं कहें कि प्रशासन ने नेता के प्रभाव में आकर 11 बेगुनाहों की जिन्दगी को नीलाम कर दिया। क्या एक लाख रुपए में उनकी जिंदगी दोबारा वापस लाई जा सकेगी, जिनके परिवार का सहारा अब इस दुनिया में नहीं रहा। उनके परिवार का भरण पोषण कौन करेगा, पीड़ित परिजनों की जिन्दगी कैसे कट पाएगी? इसका जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है।

शहर में 11 मौत प्रकरण में हमने सभी जिम्मेदार पद पर बैठे अफसरों से बात की और निष्कर्ष निकालने की भी कोशिश की आखिर कौन इसका जिम्मेदार है।

‘‘अगर गांव को अथॉरिटी ने गोद ले रखा है तो घटना के लिए अथॉरिटी भी जिम्मेदार है। यह जांच का विषय है। जिला प्रशासन की रिपोर्ट आने पर मामले की उचित कार्रवाई की जाएगी।’’
ललित श्रीवास्तव
चेयरमैन, नोएडा-गेट्रर नोएडा

‘‘दीवार गिरने का मुख्य कारण बारिश है। इस लिहाज से घटना को प्राकृतिक आपदा भी कहा जा सकता है। घटना दुर्भावना अथवा साजिश से प्रेरित नहीं है। सिटी मजिस्ट्रेट जांच कर रहे हैं। रिपोर्ट के बाद ही कुछ और कहा जा सकता है। मुङो काम बहुत है जिसके कारण में अभी तक प्रशासनिक नियमों को ठीक से नहीं देख पाई हूं। एक-दो दिन बाद समय मिलेगा तो देखूंगी।’’
सारिका मोहन
प्रभारी डीएम

‘‘आंधी-तूफान, भूकंप, बाढ़ के साथ-साथ बारिश से दीवार गिरना भी प्राकृतिक आपदा है। प्रशासन द्वारा मजिस्ट्रेटी जांच की जा रही है, जिसमें दीवार के निर्माण के संबंध में बारीकी से जांच की जाएगी। ऐसे में पुलिस जांच नहीं कर सकती। मजिस्ट्रेटी जांच में यदि रघुराज सिंह दोषी पाये जाते हैं तो कारवाई की जाएगी।’’
अशोक त्रिपाठी
एसपी सिटी

‘‘हमने अपने बायलॉज देखे हैं। अथॉरिटी बड़ी घटना के प्रति संजीदा है। हमने अपने सभी नियम देखे तो पता चला कि इस पर कार्रवाई का अधिकार जिला प्रशासन व पुलिस का है, लेकिन फिर भी हमने इसमें पारदर्शी जांच के लिए सिटी मजिस्ट्रेट व डीएसपी को निर्देश दिए हैं।’’
आर. पी. अरोड़ा
एसीईओ, नोएडा

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