अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

क्रॉयलर पालन को विशेष प्रोत्साहन

सूबे में क्रॉयलर पालन को विशेष प्रोत्साहन देने के लिए हरेक जिले में एक मदर यूनिट स्थापित की जाएगी। इसमें क्रॉयलर को शुरुआती 18 दिन तक पशु पालन विभाग खुद पालेगा। रोग से मुक्ति व उनमें प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए टीके भी मदर यूनिट में ही लगाए जाएंगे। इसके बाद उन्हें वेंडरों को बेचा जाएगा। जगह-जगह नियुक्त वेंडरों से इन क्रायलरों को किसान खरीद सकेंगे।


इसके लिए जल्दी ही वेंडरों को ट्रेनिंग दिए जाने की पुष्टि मुख्य तकनीकी शिक्षा अधिकारी डॉ. डीके शर्मा ने की है। प्रत्येक मदर यूनिट में 7-8 हजार चूजे रखे जाएंगे। इन चूजों को विभिन्न हेचरी से खरीदने के बाद 18 दिन तक देखभाल पशुपालन विभाग ही करेगा। रिमोट एरिया में क्रॉयलर के मीट व अंडों की उपलब्धता के लिए यह प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। 18 दिन का क्रॉयलर 25 रुपये में वेंडर को बेचा जाएगा। वेंडर से किसान इसे 32 रुपये में ले सकेंगे।


विभागीय अधिकारियों को उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगा। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हर जिले में फिलहाल एक मदर यूनिट स्थापित करने की योजना है। सफलता मिलने पर मदर यूनिट की संख्या बढ़ाई जाएगी। जानकार बताते हैं कि 13 जिलों में इस प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए नौ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

 

 

तुलना एक नजर में

क्रॉयलर          ब्रॉयलर
10 रुपये का चूजा        18 रुपये का चूजा   
35-40 दिन में एक किलो वजन      30 दिन में एक किलो वजन  
(व्यावसायिक पालन पर)
अंडे का वजन 80-90 ग्राम      अंडे का वजन 50-60 ग्राम
मूल्य 120 रुपये प्रति किलो (लाइव)     मूल्य 60-70 रुपये प्रति किलो (लाइव)          
आसानी से बीमारी नहीं पकड़ती      रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है  
बहुरंगी होने से आकर्षक लगता है       रंग में सफेद होता है

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:क्रॉयलर पालन को विशेष प्रोत्साहन