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अनिवार्य हो दसवीं बोर्ड परीक्षा

असली सोना जब आग से गुजर कर बाहर निकलता है तो ‘सोने की चमक’ दुगनी हो जाती है, इसी प्रकार से छात्रों की अग्निपरीक्षा व योग्यता की परख तभी होती थी, जब वह 10वीं की बोर्ड की परीक्षा देकर परीक्षा में उत्तीर्ण व अनुतीर्ण होता था एवं उसे यथार्थ अंकों की प्राप्ति होती थी, मगर सरकार द्वारा 10वीं की परीक्षा का बोर्ड इम्तिहान बंद किया जाना सर्वथा अनुचित है, इससे योग्य छात्रों की परख करना मुश्किल हो जाएगा।

राजेन्द्र सिंह रावत, नई दिल्ली

रेल का खेल मजाक

इस नाजुक वक्त में महिला रेल और डबल डैकर रेल की बात हवाई उड़ान ही लगती है। महिला रेल कितनी महिलाओं को कितनी बार ला और ले जा सकेगी? क्या इतने व्यस्त ट्रैफिक में यह सब मुमकिन है? रेलवे स्टेशनों की सड़कों की मरम्मत, सफाई और रेलवे क्रासिंग पर पुलों आदि की आज सख्त जरूरत है जिसका कोई जिक्र ही नहीं है।

वेद, मामूरपुर,नरेला, दिल्ली

दाल के नखरे

राजधानी में 90 रु. प्रति किलोग्राम की ऊंचाई पर पहुंची दाल के विषय में पूर्वी दिल्ली का खुदरा बाजार या फिर नया बाजार की ‘दिल्ली ग्रेन मार्केट (मर्चेट) एसोसिएशन’ का कैसा भी मत हो? परंतु भोजन की थाली दाल के बिना अधूरी ही दिखाई देती है। ‘घर की मुर्गी दाल बराबर’ या ‘दाल रोटी खाओ प्रभु के गुण गाओ’ जैसी कहावतों में आज भी बड़े से बड़ा रईस भी अपने सुखी समय में यही कहता है कि ‘बस खा रहे हैं दाल-रोटी चैन से’ वैसे भी आप महंगी से महंगी सब्जी बना लो परंतु बिना दाल के टेबल  खाली ही दिखाई देती है।

राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली

हिंदी बनाम अंग्रेजी

‘जबान गोया पैन इंडियन है’ में सही लिखा है कि मनोरंजन, मस्ती और संवाद के रूप में हिंदी का जवाब नहीं, मगर पैन इंडियन होने के लिए हिंदी को सरकारी मदद लेने की बजाए जनता से प्रेस प्राप्त करना होगा। हिंदी को पैन इंडियन बनाना है तो इसे एक मानक भाषा न बनाएं। दूसरी भाषाओं के शब्द भी इसमें जगह पाएं, ताकि अमर-अकबर-अंथोनी, ‘अय्यर-नय्यर’, ‘सिंह-सेन’ सब को लगे इसमें उनका अपना ही कुछ है। अंग्रेजी भी तो स्थानीय स्वरूप ओढ़ कर प्रिय भाषा बनी है। मगर जैसा कि जोशी जी ने सही लिखा है हर भारतीय को हिंदी व मातृ भाषा के साथ-साथ अंग्रेजी का पूर्ण ज्ञान जरूर होना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं और भूमंडलीकरण की जरूरतों के मद्देनजर हमारे नौजवानों को आगे बढ़ने में अंग्रेजी बहुत मददगार साबित होगी।

डॉ. आर. के. मल्होत्र,  नई दिल्ली

बाकी खोदे घास

वो ही है झक्कास
जिसके नोट पास
बाकी ना करें आस
खोदते रहें घास।

वीरेन कल्याणी, शाहदरा, दिल्ली

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