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मामला महिला जवानों को लिंग-विभेदीकरण के आधार नौकरी से निकाले जाने का

बीएमपी में नियुक्त महिला जवानों को लिंग-विभेदीकरण के आधार पर राज्य सरकार द्वारा नौकरी से निकाले जाने के आरोप को लेकर विधानसभा में विपक्ष ने गुरुवार को हंगामा किया और वेल में जाकर नारेबाजी की। मुजफ्फरपुर जिले के मुखिया प्रेमचन्द्र सिंह के मामले पर राजद विधायकों ने भी शोर-शराबा की। इसके पूर्व भाकपा माले, सीपीआई और सीपीएम के विधायकों ने विधानसभा के मुख्य गेट पर बीएमपी मामले को लेकर खूब नारेबाजी की।

दोनों ही मामले पर विपक्ष द्वारा लाये गये कार्यस्थगन प्रस्ताव को विधानसभा अध्यक्ष ने अस्वीकार कर दिया।
शून्य काल में सीपीएम के रामदेव वर्मा ने कहा कि बिहार सैन्य पुलिस (बीएमपी) में 157 महिलाओं का चयन हुआ। इनमें से कुछ महिला उम्मीदवारों का चयन के बाद प्रशिक्षण भी हो गया जबकि कुछ प्रशिक्षण प्राप्त कर रही थीं। ड्यूटी देने की बजाय बीएमपी मुख्यालय पटना द्वारा इनकी नियुक्ति को वैध नहीं मानते हुए नौकरी से हटा दिया गया है।

बीएमपी के महानिदेशक द्वारा यह निर्देश निकाला गया कि बीएमपी की वाहनियों में महिलाओं की नियुक्ति नहीं की जानी है। इससे स्पष्ट है लिंग विभेदीकरण के कारण इन नियुक्त महिला जवानों को नौकरी से निकाला गया है। श्री वर्मा कार्यस्थगन के जरिए सरकार से इस पर स्पष्ट जवाब मांग रहे थे।

कार्यस्थगन प्रस्ताव अस्वीकार कर दिये जाने के कारण सभी वाम दलों के विधायकों ने हंगामा किया और वेल में जाकर सरकार से जवाब देने की मांग करते रहे। उन्होंने कार्यवाही शुरू होने के समय भी शोर-शराबा की।

 

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  • Web Title:विधानसभा में विपक्ष का हंगामा और वेल में नारेबाजी