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90 दिन में तैयार होने वाला धान लगाने की किसानों को सलाह


 राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान परिषद ने सूखे से निपटने के लिए आकस्मिक योजना बनाई है। पटना स्थित परिषद के पूर्वी क्षेत्र कार्यालय ने अपनी योजना में किसानों को हर स्थिति से निपटने के लिए उपाय सुझए हैं। बिहार कृषि मैनेजमेंट एण्ड एक्सटेंशन ट्रेनिंग इंस्टीच्यूट (बामेति) ने इस योजना को सभी जिलों में भेज दिया है। इसके लिए परिषद ने बिहार को तीन भागों में बांट कर किसानों को सुझव दिए हैं।

पहले भाग में पू. और प.चंपारण, सीवान, सारण, शिवहर, मुजफ्फरपुर, वैशाली, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, गोपालगंज और बेगूसराय को रखा गया है। ये वैसे इलाके हैं जहां चावल, गेहूं, मक्का, ईख, आलू और मूंग प्रमुखता से उपजाए जाते हैं। एक से 15 अगस्त के बीच अगर सूखे की स्थिति है तो धान के बिचड़े को ग्राउंड वाटर के सहारे बचाने की सलाह दी गई है।

साथ ही किसानो को वैसे चावल का उत्पादन करने को कहा गया जो 80-90 दिनों में तैयार हो जाते हैं। सूखे की गंभीरता को देखते हुए किसान चारे का उत्पादन या मक्का या सोरघम का उत्पादन कर सकते हैं। दूसरे भाग में उत्तर बिहार के खगड़िया, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, अररिया और किशनगंज को शामिल किया गया है। इन इलाकों में चावल, गेंहूं, मक्का और जूट का बहुलता से उत्पादन होता है।

एक से 15 अगस्त तक सूखे की स्थिति रहने में इन इलाकों के किसानों को वैसे चावल का उत्पादक करने की सलाह दी गई है जो जल्द तैयार हो जाते हैं। इसके लिए एचवाईवी राइस की किस्म का उपयोग करना सबसे उपयुक्त होगा। एक हेक्टेयर में 40 किग्रा. फॉस्फोरस और 20 किग्रा पोटाश का उपयोग करने की सलाह दी गई है। पानी में डूबे रहने वाले इलाके में फोटोसेंसिटिव राइस की किस्म का प्रयोग करना बेहतर होगा।

15 अगस्त के बाद यही स्थिति रहने पर ऊंची या मध्यम स्तर की ऊंचाई पर स्थित खेतों के किसान उड़द की नवीन और अरहर की बहार और पूसा-9 की किस्म का उपज कर सकते हैं। किसान मिश्रीकंद का भी उत्पादन कर सकते हैं।

25 अगस्त तक किसान धान की किस्म तुरंत धान या प्रभात किस्म का प्रयोग कर सकते हैं। किसानों को वैसे सब्जियों के उत्पादन की भी सलाह दी गई है जिसमें कम पानी की आवश्यकता होती है।

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  • Web Title:कृषि अनुसंधान परिषद ने दी सूखे से निपटने की सलाह