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पिता के सपने को भूल गए मुकेशः अनिल अंबानी

पिता के सपने को भूल गए मुकेशः अनिल अंबानी

हमला जारी रखते हुए अनिल अंबानी ने अपने अग्रज मुकेश अंबानी पर लालच के लिए उनके पिता धीरूभाई के सपने के साथ सौदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुकेश अंबानी गैस विवाद के समाधान में अपनी मां कोकिलाबेन के विचारों की भी अब परवाह नहीं करते।

अनिल ने कहा कि दुर्भाग्य से व्यावसायिक लालच में आरआईएल ने संस्थापक चेयरमैन दिवंगत धीरूभाई अंबानी के सपने को भी भुला दिया है। अनिल ने जोर देकर कहा कि उन्होंने सभी मुद्दों के समाधान के लिए ईमानदार प्रयास किये, लेकिन सफल नहीं हो सके। बहरहाल, मुकेश ने अपने अनुज अनिल के साथ विवाद को सार्वजनिक स्तर पर ले जाने से इनकार किया।

अनिल के इस बयान के बारे में पूछे जाने पर कि उनके बड़े भाई मुकेश विवादों के समाधान में अपनी मां कोकिलाबेन के विचारों की भी अब परवाह नहीं करते, मुकेश अंबानी के प्रवक्ता ने कहा, हम निराधार, दुर्भावनापूर्ण और गलत आरोपों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते।

परिवार में बड़ों को लेकर मुकेश की उपेक्षा को लेकर नाराजगी जताते हुए अनिल ने कहा, मेरे आदरणीय बड़े भाई हमेशा से परिवार और परिवार के बाहर यह स्पष्ट कर चुके हैं कि वह इस मामले को गैस आपूर्ति विवाद या अन्य किसी भी मामले में मेरी पूज्य मां की आगे कोई भूमिका नहीं देखते।

दोनों भाईयों के बीच मतभेद पैदा होने के दो साल बाद 2005 में कोकिलाबेन की निगरानी में रिलायंस एंपायर का विभाजन हुआ था।


यह पूछे जाने पर कि क्या वह कानून विवाद का कोई विकल्प या अदालत के बाहर कोई समझौता देखते हैं, अनिल ने कहा, मैंने हर स्तर पर सभी मसलों का सौहर्दपूर्ण समाधान करने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हो पाया।

उन्होंने कहा, बंबई उच्च न्यायालय के फैसले के बाद स्वीकार्य समझौते पर पहुंचने के लिए पिछले महीने हमने आरआईएल को कई पत्र लिखे, लेकिन आरआईएल ने सहयोग से इनकार किया। उसके बाद उन्होंने एकतरफा उच्चतम न्यायालय में जाने का निर्णय किया।

गौरतलब है कि 15 जून को उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों को स्वीकार्य तौर-तरीकों के निर्धारण के बाद आरआईएल को आरएनआरएल को 2.34 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू पर गैस आपूर्ति किये जाने का निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय ने यह भी सुझाव दिया था कि अगर वे स्वयं से कोई समझौता नहीं कर पाते हैं तो इसके समाधान के लिये अपनी मां के पास जा सकते हैं।

गैस कीमत मामले में संसद में विपरीत रूप अपनाने के लिए तेल मंत्रालय की कटु आलोचना करते हुए अनिल ने कहा कि अगर मंत्रालय का मकसद 10 साल बाद उत्पादन साझीदारी समझौता को फिर से लिखवाना है तो उसकी पवित्रता क्या होगी। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा, क्या यह मिसाल पेश नहीं करेगा जिसके आधार पर कोई मंत्रालय भविष्य में अरबों डॉलर के निवेश को जोखिम में डालते हुए अपनी इच्छा के मुताबिक किसी भी अनुबंध में बदलाव करेगा।

अपने शेयरधारकों के हितों की रक्षा के लिए यथाशक्ति हर प्रकार के कदम उठाने का संकल्प लेते हुए अनिल ने कहा कि आरआईएल द्वारा अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) को पूर्व में हुई सहमति के तहत निर्धारित कीमत 2.34 प्रति एमएमबीटीयू समूह के कारपोरेट पुनर्गठन का अभिन्न हिस्सा था।

उन्होंने कहा कि ये सभी कदम हमारे महान संस्थापक दिवंगत धीरूभाई अंबानी के उन सपनों को पूरा करने के लिये उठाये गये थे जो उन्होंने रिलायंस को संपूर्ण मूल्य शृंखला के लिये कल्पित की थी। अनिल ने कहा, दुर्भाग्य से व्यावसायिक लालच में धीरूभाई के सपने को आरआईएल ने भुला दिया।

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