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पंजाब में गेहूं की खेती के तरीके बदलने लगा है हैप्पी सीडर

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित बुवाई मशीन हैपी सीडर प्रदेश में गेहूं की खेती का तरीका बदल रही है। इसके प्रयोग से खेतों में धान की डंठल को फूंकने से होने वाले पर्यावण प्रदूषण में कमी के साथ-साथ जमीन में पोषक तत्वों का बचाव और नमी का संरक्षण भी हो रहा है तथा इससे खेती की लागत भी कम हुई है।

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के सहायक प्रोफेसर और हैप्पी सीडर के विकास से जुड़े़ डां मनप्रीत सिंह ने कहा कि प्रदेश के किसान कंबाइन हारवेस्टर से धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई की तैयारी के लिए खेतों में बचे धान के डंठल को जला देते थे। इससे न केवल आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण फैलता है बल्कि इसके कारण बोरोन, मैगनीज, आयरन, तांबा, जस्ता जसे माइक्रो न्यूट्रिएंटस भी नष्ट होते हैं। पुन: जलाने के कारण मिटटी की ऊपरी सतह भी जल जाती थी जिससे सिंचाई के लिये पानी की ज्यादा जरूरत होती है।

डां सिंह ने कहा कि हैप्पी सीडर मशीन एक तरफ धान की डंठलों के ऊपरी भागों को काटकर हटाती है और साथ-साथ कतारों में गेहूं की बुवाई भी करती जाती है। धान के शेष अवशेषों को खेतों में दबा देती है। इस तरह गेहूं की बुवाई समय से होती है और धान के अवशेषों से खेत ढका होने से नमी बनी रहती है एवं अंकुरण अच्छा होता है।

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  • Web Title:पंजाब : खेती के तरीके बदलने लगा है हैप्पी सीडर