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ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे..

ये दोस्ती हम नहीं  छोड़ेंगे..

यूं ही मिलते रहें
दोस्तो, मिलने का  बहाना कोई भी हो सकता है। एक दूसरे के बर्थडे पर मिलने का मौका कभी मत जाने दो। इसके अलावा तुम अपने घर में किसी खुशी के मौके पर अपने दोस्त को बुलाना कभी मत भूलो। दोस्तो, ये छोटे-छोटे मौके ऐसे होते हैं, जो तुम्हें नजदीक लाते हैं। त्योहारों को मिल-जुल कर मनाओ। अगर तुम्हारे यहां कोई ऐसा त्योहार मनाया जाता है, जो तुम्हारे दोस्त के यहां नहीं तो उसे अपने घर आने का निमंत्रण जरूर दो। कभी-कभी मिलते रहने से अपने दोस्त के सुख-दुख से अनजान नहीं रहोगे। मान लो जिसे तुमने दोस्त कहा है, स्कूल की किसी परीक्षा से ठीक पहले बीमार पड़ जाता है। ऐसे वक्त में तुम उसकी मदद कर दोगे तो तुम्हारा दोस्त इस बात को कभी नहीं भूल पाएगा। अगर तुम्हारा दोस्त तुम्हारे घर के आसपास ही रहता है तो तुम मॉर्निग वॉक या शाम को अपने-अपने पैट्स के साथ पार्क में भी तो मिल सकते हो।

एल्युमनी से नहीं होंगे दूर
आज एल्युमनी नेटवर्क बनाया जाना भी सामान्य सी बात हो गई है। छोटे से छोटे इंस्टिटय़ूट से लेकर बड़े से बड़े संस्थान तक एल्युमनी नेटवर्क बना चुके हैं। यह एक ऐसा विकल्प है, जहां तुम्हें अपने सीनियर जूनियर साथियों से संपर्क करने का मौका मिलेगा। किसी के अनुभवों का तुम्हें फायदा होगा तो कोई तुम्हें आगे बढ़ने के लिए खास टिप्स बताएगा। दुनिया भर के तमाम स्टूडेंट इस के जरिए एक दूसरे से संपर्क बनाए हुए हैं। सोचो अगर तुम्हारा कोई दोस्त विदेश में जा बसा हो, तब भी यह मुमकिन है कि तुम उसके करीब रह सको। अधिकतर एल्युमनी में जुड़ने के लिए एक रजिस्ट्रेशन करवाया जाता है और तुम पाते हो एक यूजर आईडी और पासवर्ड। अब बस तुम्हारा दोस्त तुमसे एक क्लिक भर की दूरी पर होता है, अगर वह भी उसी एल्युमनी का हिस्सा है। दोस्तों इस की सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि तुम सब का अपना होम पेज होता है। इस होमपेज पर तुम्हारे फोटा और प्रोफाइल के साथ एक गेस्टबुक भी होती है, जिसमें गेस्ट अपना संदेश छोड़ देते हैं। इसी के साथ तुम्हारे पास इनबॉक्स की भी सुविधा होती है, जहां तुम अपने पर्सनल मैसेजेस भी पा सकते हो।

सोशल नेटवर्किग साइट्स का साथ
ऑरकुट, फेसबुक, ट्विटर, हाय फाइव आदि बहुत सी सोशल नेटवर्किग साइट्स हैं, जिनके जरिए तुम अपने दोस्तों के संपर्क में रह सकते हो। मजे की बात यह है कि इन साइट्स की वजह से तुम्हें घंटों चैट करने की जरूरत नहीं, बल्कि जब समय मिले एक स्क्रैप करना होता है। जब तुम्हारे दोस्त को समय मिलेगा, वह स्क्रैप का जवाब दे देगा। इससे तुम एक दूसरे के संपर्क में बने रहोगे। और जब कभी एक दूसरे से मिलने का मौका मिलेगा तो ऐसा नहीं लगेगा कि सालों बाद मिल रहे हो। यहां ध्यान रखना कि तुम अपने दोस्तों के लिए यहां मौजूद हो। जब तक बहुत जरूरी न हो, अजनबियों को अपनी फ्रैंड लिस्ट में शामिल करने से बचो।

सामने सिगनल की बत्ती लाल है, धीरे-धीरे गाड़ियों की कतार लग चुकी है और लाल बत्ती के हरी होने का इंतजार..। तभी गाड़ी में बज रहे म्यूजिक की ताल में खोए रवि की नजर अपनी बाईं ओर पड़ी। बगल वाली गाड़ी में बैठे शख्स का चेहरा जाना-पहचाना लगा। दोनों एक दूसरे को देखने लगे। तभी दूसरी ओर से अमित जोर से चिल्लाए ओए तू रवि है ना! दोनों की आखों की चमक बता रही थी कि अब वे जान चुके हैं कि वे दोनोंे बचपन के दोस्त हैं। दोनों ने गाड़ी एक तरफ लगाई और एक दूसरे से जोर से लिपट गए। ऐसी होती है बचपन की दोस्ती। बहुत सी वजहों से हम अपनी दोस्ती को बरकरार नहीं रख पाते। जिसके एक दिन स्कूल न आने पर तुम उदास-उदास से रहते हो, क्या तुम नहीं चाहते कि वह जीवन भर तुम्हारा दोस्त बना रहे?

फोन में होगी गपशप
कभी इस बात का इंतजार मत करो कि तुम ही अपने दोस्त को पहले फोन क्यों करोगे। जब आखिरी बार बात हुई थी तो मैंने ही फोन मिला कर अपने दोस्त का हालचाल जाना था आदि।
जब तुम्हें अपने दोस्त की याद आए, तुरंत फोन उठाओ और पूछ लो दोस्त कैसे हो। जब हम निस्वार्थ अपने दोस्त के करीब रहना चाहते हैं तो सारी मुश्किलें आसान हो जाती हैं। कभी-कभी अपने पेरेंट्स को बता क र फोन करने में उन्हें भी कोई आपत्ति नहीं होगी। अगर तुम अधिक व्यस्त हो तो एक एसएमएस करके भी तुम अपने दोस्त के हालचाल पूछ सकते हो। देखना जवाब जरूर आएगा।

स्कूल कम्युनिटी भी पीछे नहीं

आजकल लगभग सभी स्कूल्स की अपनी-अपनी वेबसाइट्स हैं। जैसे ही स्कूल की वेबसाइट्स पर क्लिक करते हैं तो वहां एक रजिस्टर टैब होता है। इस रजिस्टर टैब पर क्लिक करने के बाद तुम्हें अपना नाम, क्लास, सेक्शन, घर का पता, फोन आदि भरना होता है। इसके बाद तुम उस सूची में आ जाते हो, जिसमें तुम्हारे दूसरे साथी होते हैं। इसकी खास बात यह है कि तुम किस वर्ष उस स्कूल में थे, यह भी पता चल जाएगा। कुछ स्कूल्स ने तो पुराने छात्रों के निजी ब्लॉग का लिंक भी स्कूल साइट्स में दिया हुआ है।

सोचो आज तुम उस साइट में रजिस्टर हो गए और कल अपने ब्लॉग के जरिए तुम बताओगे कि आज तुम फलां जगह जॉब या बिजनेस कर रहे हो तो उस समय के तुम्हारे दोस्त को तुम्हें ढूंढ़ना कितना आसान होगा। और फिर से बचपन की यादें एक बार फिर ताजा हो जाएंगी। और यकीन मानो तुम्हारी दोस्ती दिन ब दिन गहरी होती चली जाएगी।  तो फिरदेर किस बात की है। अपने स्कूल की वेबसाइट का जल्दी से जल्दी एक हिस्सा बन जाओ। कल तुम्हारे लिए अपने पुराने दोस्तों से संपर्क में बने रहना का एक अच्छा प्लेटफॉर्म तैयार हो जाएगा।

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