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12 दिन तक दबाकर रखी गई दलित महिला की मौत

सामुदायिक स्वास्थ्य केंन्द्र पिहानी में लापरवाही के चलते प्रसव के दौरान हुई एक दलित महिला की मौत को 12 दिन तक छुपाए रखा गया। सीएचसी प्रशासन ने इसकी जानकारी सीएमओ तक को नहीं दी। खुलासे और कार्रवाई से बचने के लिए अस्पताल के डॉक्टरों ने दलित महिला के पिता को धक्के देकर भगा दिया। धमकी भी दी गई कि अगर किसी के सामने जुबान खोली, तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। बुधवार को मामले के खुलासे के बाद स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई है। सीएमओ डॉ जेपी उपाध्याय ने पूरे मामले की जाँच के आदेश दिए हैं। सीएमओ के मुताबिक दोषी पाए जाने पर चिकित्सकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। जिले के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के दौरान बच्चो की मौत की यह चौथी घटना है।


पिहानी के गाँव बरम्हौला निवासी दलित गोकरन प्रसाद ने प्रसव के लिए अपनी पुत्री सीमा को सामुदायिक स्वास्थ्य केंन्द्र पिहानी में 17 जुलाई को भर्ती कराया था। बताते हैं कि बच्चे को जन्म देने के बाद दलित महिला की हालत बिगड़ गई। परिवारीजन ने जब डॉक्टरों से इलाज किए जाने की गुहार लगाई, तो उनकी नहीं सुनी गई। रात भर परिवारीजन डॉक्टरों से मिन्नतें करते रहे, लेकिन उनका दिल नही पसीजा। इसी के चलते 18 जुलाई की सुबह दलित सीमा की मौत हो गई। दलित गोकरन प्रसाद का आरोप है कि रुपए न देने पर पर डॉक्टरों ने उसकी बेटी का इलाज नहीं किया। जिसके चलते उसकी पुत्री की मौत हो गई। यह मामला तब खुला, जब दलित गोकरन प्रसाद ने लोकवाणी के माध्यम से इसकी शिकायत डीएम से की। गंभीर बात यह है कि सीएचसी अस्पताल का प्रशासन 12 दिन तक प्रसव के दौरान दलित महिला की मौत को छुपाए रहा। दलित गोकरन प्रसाद ने अपनी शिकायत में कहा है कि उसे न्याय दिलाकर दोषी डॉक्टरों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

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