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धर्मगुरूओं ने की समलैंगिकता की खिलाफत

विश्व सनातन धर्म परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विश्व धार्मिक सौहाद्र्र परिषद के अध्यक्ष महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने कहा कि समलैंगिकता सभी धर्मो के विपरीत है, जिसको शीघ्र रोका न गया, तो सृष्टि का अस्तित्व खतरे में आ जाएगा। धर्म से समाज को संस्कृति की शिक्षा मिलती है और भारतीय संस्कृति से छेड़छाड़ अथवा परिवर्तन करने का अधिकार किसी के पास नहीं है।


सभी धर्मगुरूओं की ओर से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजे ज्ञापन में उन्होंने कहा कि प्रकृति के विधान के साथ छेड़छाड़ करने के दुष्परिणाम मानवता के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। समलैंगिकता सभी धर्मो पर सीधा प्रहार है, जिसे कानूनन मान्यता नहीं मिलनी चाहिए। स्वामी बालकानंद महाराज ने समलैंगिकता को सनातन संस्कृति का अपमान बताते हुए कहा कि संस्कृति ही भारत की विशेषता है, जिसे विश्व में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। जिस दिन यह संस्कृति समाप्त हो जाएगी, उसी दिन भारत की विश्व में पहचान विलुप्त हो जाएगी। बैठक में उपस्थित सभी धर्मगुरूओं ने अपने-अपने धर्मशास्त्रों का हवाला देते हुए समलैंगिकता को समाप्त करने संबंधी विधेयक लोकसभा में पास कराने की अपील की।


प्रेषित ज्ञापन पर हनीफ खान शास्त्री, फादर बाबू जोसेफ, जामिया उलेमा ए हिन्द के मौलाना अब्दुल हमीद, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. भिक्षु सत्यपाल, शिरोमणि अकाली दल (बादल) के अध्यक्ष जत्थेदार मनजीत सिंह, फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम, उत्तर पूर्व क्रिश्चियन काउंसिल के अध्यक्ष थामस थैलू और डा. कृष्ण दत्त तिवारी मौजूद थे।

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