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बिगड़ते लिंगानुपात से बिगड़ रहा है सामाजिक संतुलन

प्रदेश में चार हजार अल्ट्रासाउंड केन्द्र चल रहे हैं। इसमें सिर्फ 800 केन्द्रों का संचालन कानूनी तौर पर सही है। बाकी सेंटर झोलाछाप के सहारे है। पश्चिमी जिलों में अल्ट्रासाउंड मशीनों, अनुवांशिक जाँच केन्द्रों और पुत्र रत्न की प्राप्ति जैसे क्लीनिक संचालकों की संख्या बढ़ रही है। उन पर कोई रोक-टोक नहीं। उन पर निगरानी भी नहीं होती। कानून का पालन नहीं हो रहा है। नतीजे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आठ जिलों में लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या में तेजी से गिरावट दर्ज हो रही है। लड़कियों की खरीद-फरोख्त बढ़ रही है। बागपत में कई ऐसे परिवार है जहाँ चार-पाँच भाईयों के बीच एक ही पत्नी है।

बिगड़ते लिंगानुपात की यह भयानक तस्वीर बुधवार को यहाँ उत्तर प्रदेश न्यायिक प्रशिक्षण अनुसंधान संस्थान गोमतीनगर में कानून के रखवालों के सामने पेश की गई।
प्रसव पूर्व निदान तकनीक(नियमन एवं दुरुपयोग निषेध) कानून 1994 पर आयोजित कार्यशाला में न्यायिक अधिकारियों(जूनियर डिवीज़न) से इस गम्भीर मसले पर गौर करने की बात कही गई। वक्ताओं ने कहा कि कानून का पालन सही ढंग से नहीं हो रहा है। इसमें लिप्त लोगों के खिलाफ कारवाई नहीं होती । नियमों को दरकिनार करके गर्भधारणपूर्व एवं प्रसव पूर्व लिंग जाँच की सभी तकनीकों वाले केन्द्र खुल रहे हैं। वात्सल्य और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण उत्तर प्रदेश के संयोजन में हुई कार्यशाला में डॉ.नीलम सिंह ने समूचे उत्तर प्रदेश के लिंगानुपात का आँकड़ा पेश किया।

डॉ. सिंहके मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लड़कियों की कमी के चलते बुंदेलखण्ड और उड़ीसा से लड़कियों को खरीदकर लाया जाता है। महिलाओं पर यौन हिंसा, छेड़खानी आदि के मामले बढ़े हैं। नवजात बच्ची को कूड़े के ढेर या रेलवे स्टेशन पर छोड़ देने की घटनाएँ बढ़ी हैं। गम्भीर सामाजिक असंतुलन पैदा हो रहा है। ऐसे में न्यायिक अधिकारियों की भूमिका बढ़ी है। डॉ. सुधाकर राव ने कहा कि पुत्र रत्न की प्राप्तिजैसे विज्ञापनों पर रोक है। ऐसा करना अपराध माना जाता है। उसके बावजूद ऐसे क्लीनिक व संस्थाएँ धड़ल्ले चल रही है और अपना प्रचार-प्रसार भी कर रही हैं। कार्यशाला में इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ओपी श्रीवास्तव,डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय लखनऊ के कुलपति प्रो. बलराज चौहान समेत कई न्यायिक अधिकारी व सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे।

कुछ तथ्य-
 प्रति एक हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या(0-6) आयु वर्ग तक
 23 जिलों में 850-899 के बीच
40 जिलों में 900-950 के बीच
7 जिलों में लिंगानुपात 950

-मथुरा, बुलंदशहर,शाहजहाँपुर,मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर में स्थिति पंजाब,हरियाणा व दिल्ली के बराबर यूपी पुलिस के आँकड़ों के मुताबिक महिलाओं के प्रति ¨हसा में वृद्धि- 2008 तक
-बलात्कार केस-8 प्रतिशत
-शील भंग के केस-35.2 प्रतिशत
-अपहरण केस- 33 प्रतिशत
-छेड़खानी के केस में 60.5 प्रतिशत

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