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रिलेशनशिप ऑफिस

ऑफिस में लोगों के साथ आपसी संबंध बनाकर रखना भी एक कला है, और हर शख्स को इस इस कला में उस्ताद बनने की कोशिश करनी चाहिए। इसलिए अगर आप इन सात नियमों पर अमल करें, तो धीरे-धीरे अंतर-वैयक्तिक संबंधों के उस्ताद बन सकते हैं। 

- जब आपका कहने का ढंग धमकी, क्रोध, आरोपण या कटाक्षपूर्ण होगा, तो सामने वाला डरेगा, जबकि सम्मान, संतोष और स्वीकार्यता के भाव से कही गई बात का असर
अच्छा रहेगा। 

- आलोचना और हमले कौन नहीं करते? मगर कुछ लोग बड़े प्यार से और मिठास का मुलम्मा चढ़ाकर ये काम करना जनते हैं। कम्युनिकेशन की लड़ाई शब्दों के हथियार से ही जीती जाती है, इसलिए जुबान के घाव न बनने दें।

- अच्छा कम्युनिकेटर वह है, जिससे मिलने के बाद लोगों को अच्छा अनुभव होता है। ऐसा तभी होता है, जब आप केवल शब्दों पर गौर करने के बजाय इमोशन का भी ध्यान रखें।

- अक्सर कम्युनिकेशन में गलतफहमी की वजह से ही संबंधों में खटास आता है। कहीं कहते समय गलत शब्द बोल दिया, तो कहीं कहे गए शब्द का गलत मतलब निकाल लिया गया, तो समझ लीजिए रिलेशनशिप पर असर पड़ना ही है।

- माना कि ऑफिस मीटिंग्स में कुछ न कहना काफी कठिन होता है। लेकिन कई लोग बोलते रहने के लिए ही मीटिंग में जाते हैं। मगर इम्प्रैशन तभी बनता है जब नपी-तुली और सधी हुई बात कही जाए।

- दो लोगों की बातचीत में टांग न अड़ाएं। पहले सुनें, मसले को समझें और जब वे दोनों अपनी बात कह लें, तभी अपना मुंह खोलें।

- ध्यान रखें, बड़े लोग आइडिया पर सोचते और बात करते हैं, औसत लोग हालात पर सोचते और बात करते हैं, जबकि टुच्चे लोग दूसरे लोगों के बारे में गप करते हैं। इसलिए गप न लड़ाएं।

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